आर्यसमाजियों को बताया आत्मा के बल बढऩे का रहस्य
सिरसा। महर्षि दयानंद सरस्वती ईश्वर की उपासना, ध्यान, चिंतन की अवस्था का वर्णन करते हुए लिखते हैं कि ईश्वर की उपासना, ध्यान व चिंतन करने से जीवात्मा के दुर्गुण, दुव्र्यसन व दुख दूर होकर ईश्वर के गुण, कर्म, स्वभाव के अनुरूप हो जाते हैं। ये शब्द आर्यसमाज बेगू रोड स्थित सिरसा के कार्यकारी प्रधान भूप सिंह गहलोत ने साप्ताहिक हवन यज्ञ व वैदिक सत्संग के अवसर पर कहे। उन्होंने बताया कि यही नहीं आत्मा का बल इतना बढ़ जाता है कि पहाड़ के समान दुख प्राप्त होने पर भी नहीं घबराता। जीवात्मा के गुण, कर्म, स्वभाव ईश्वर के अनुरूप होने से सुखों की पराकाष्ठा आनंद से सराबोर हो जाता है। यही अवस्था मोक्ष मेें भी होती है। मोक्ष
क्योंकि जीवात्मा के सत्कर्मों का परिणाम है, अत: इसकी अवधि भी निश्चित है। वेदोंनुसार मोक्ष की अवधि एक नील, दस खरब, 40 अरब वर्ष निश्चित है। इससे पहले हवन यज्ञ किया गया। यज्ञ के ब्रह्मा कुणाल आर्य रहे। यजमान का दायित्व सुमित आर्य ने निभाया। अध्यक्षता विजयपाल सैनी ने की। हवन के पश्चात वैदिक भजनोपदेशक कृष्ण कुमार मलिक तथा ओमप्रकाश आर्य ने वैदिक भजनों से सबका मन मोह लिया। इस अवसर पर अनेक आर्यसमाजी उपस्थित थे। अंत में शांति पाठ व प्रसाद वितरण के साथ सभा का समापन किया गया।
मोक्ष जीवात्मा के सत्कर्मों का परिणाम: गहलोत
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