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श्रीकृष्ण-रूकमणि विवाह में श्रद्धालुओं ने की जमकर मस्ती

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सिरसा। श्री बजरंग दल सेवा ट्रस्ट की ओर से पुरानी हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी स्थित हनुमान मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। इस धार्मिक आयोजन में श्रद्धालुओं की भारी संख्या में भागीदारी देखने को मिल रही है। कार्यक्रम में बतौर मुख्यातिथि मनीष सिंगला, युवा कांग्रेस नेता मोहित शर्मा व श्याम प्रेमी सतीश अरोड़ा ने शिरकत की और कथावाचिका से आशीर्वाद लिया। वृंदावन से पधारीं प्रसिद्ध कथावाचिका ब्रज किशोरी ने श्रीमद्भागवत कथा में श्रीकृष्ण-रुकमणि विवाह का प्रसंग सुनाया। इस दौरान बड़े ही धूमधाम से श्रीकृष्ण-रुकमणि विवाह की बारात निकाली गई, जिसका श्रद्धालुओं ने फूलों से जोरदार स्वागत किया। मुख्य गलियों का भ्रमण कर बारात वापस कथास्थल पर पहुंची। यहां महिला श्रद्धालुओं ने फूलों की वर्षा करते हुए नृत्य किया। कथावाचिका ब्रज किशोरी ने श्रीकृष्ण-रुकमणि विवाह महोत्सव प्रसंग पर व्याख्यान करते हुए कहा कि भगवान द्वारकाधीश ने रुकमणि के सत्य संकल्प को पूर्ण किया। रुकमणि विदर्भ के राजा भीष्मक की पुत्री थी। भीष्मक मगध के राजा जरासंध के जागीरदार थे। रुकमणि का ज्येष्ठ भ्राता रुकमणि दुष्ट राजा कंस का मित्र था, जिसका कृष्ण द्वारा वध कर दिया गया था। इस कारण वह इस विवाह के विरुद्ध था। रुकमणि के माता-पिता रुक्मिणी का विवाह कृष्ण से ही करना चाहते थे, लेकिन रुक्मी ने इसका कड़ा विरोध किया। रुकमणि एक महत्वाकांक्षी राजकुमार था और वह निर्दयी जरासंध का क्रोध नहीं चाहता था, इसलिए उसने प्रस्तावित किया कि उनका विवाह शिशुपाल से किया जाए, जो कि चेदिदेश का राजकुमार व श्रीकृष्ण का फुफेरा भाई था। शिशुपाल जरासंध का एक जागीरदार और निकट सहयोगी भी था, इसलिए वह रुकमणि का भी सहयोगी था। भीष्मक अपनी आत्म इच्छा को मारकर रुकमणि का विवाह शिशुपाल के संग करने के लिए स्वीकृति दे दी, लेकिन रुकमणि जो कि इस वातार्लाप को चुपके से सुन चुकी थी। उसने शीघ्र ही एक विश्वस्त ब्राह्मण को कृष्ण को संदेश देने के लिए मना लिया, जिसमें कृष्ण को विदर्भ आकर उन्हें अपने साथ ले चलने की विनती की। श्रीकृष्ण ने युद्ध से बचने के लिए उनका हरण कर लिया। इस प्रकार श्री कृष्ण रुकमणि का विवाह सम्पन्न हुआ। आयोजकों के अनुसार इस कथा का मुख्य उद्देश्य समाज में धार्मिक और आध्यात्मिक मूल्यों को बढ़ावा देना तथा लोगों को भक्ति और सत्संग के प्रति प्रेरित करना है। कथा के माध्यम से लोगों को सदाचार, सेवा और धर्म के मार्ग पर चलने का संदेश दिया जा रहा है। श्री बजरंग दल सेवा ट्रस्ट के सदस्यों ने बताया कि कथा के दौरान प्रतिदिन प्रसाद वितरण की व्यवस्था भी की गई है। साथ ही श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर परिसर में विशेष प्रबंध किए गए हैं। इस मौके पर सदस्य प्रधान शिव शंकर गोयल, कन्हैया जिंदल, विक्की बंसल, दीपक बंसल, पवन गोयल, पंकज शर्मा, इशु, प्रेम सज्जन सोनी, डॉ. सुरेंद्र, राज कुमार गोयल, कथा संयोजक श्याम प्रेमी सतीश अरोड़ा व अन्य मौजूद रहे।

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