बेटियों के सपनों पर लगे ताले अब खुलने चाहिए: सनोवर कसवा
अधिवक्ता उत्कर्ष श्योराण व सनोवर कस्वां बोले, ग्रामीण और महिला शोधार्थियों को उनके सपनों से वंचित करना संविधान की आत्मा के खिलाफ है
सिरसा/चंडीगढ़। हरियाणा के ग्रामीण इलाकों विशेष रूप से सिरसा-फतेहाबाद की बेटियों की उच्च शिक्षा की लड़ाई अब उच्च न्यायालय चंडीगढ़, हरियाणा तक पहुंच गई है। हरियाणा उच्च न्यायालय की जॉइंट बेंच ने सिरसा स्थित चौधरी देवी लाल विश्वविद्यालय (सीडीएलयू) को नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई 16 दिसंबर 2025 तक जवाब मांगा है कि विश्वविद्यालय ने अब तक यूजीसी पीएचडी अधिनियम, 2022 को लागू क्यों नहीं किया? वो नियम जो सैकड़ों छात्रों, विशेष रूप से महिला शोधार्थियों को अपने ही जिले में पीएचडी करने का अवसर प्रदान कर सकता है।
क्या है मामला:
यूजीसी के वर्ष 2022 के अधिनियमों के अनुसार, विश्वविद्यालयों से संबद्ध कॉलेजों के नियमित शिक्षकों, जिनके पास पीएचडी की डिग्री व आवश्यक शोध प्रकाशन हैं, को पीएचडी सुपरवाइजर बनने की अनुमति दी जा सकती है, लेकिन सीडीएलयू सिरसा ने इन नियमों को न अपनाकर कॉलेज शिक्षकों को सुपरवाइजऱ (शोध निदेशक) की मान्यता देने से इनकार कर दिया। विश्वविद्यालय में कुल 29 विभाग है, जिसमें से केवल 16 विभागों में ही पीएचडी की सीटें निकाली गई हैं, इन 16 में से भी 2 विभाग ऐसे हैं जिनमें भारतीय शोधार्थियों के लिए सीट जीरो है। विश्वविद्यालय में शिक्षक स्टाफ की कमी के चलते और यूजीसी के नियम न मानने के कारण विश्वविद्यालय में पीएचडी सीटों की संख्या आधी से भी कम रह गई। सीडीएलयू सिरसा की इस मनमानी नीति के चलते सिरसा और फतेहाबाद जैसे ग्रामीण जिलों के प्रतिभाशाली छात्रों और महिला शोधार्थियों के लिए गहरी निराशा का कारण बन गई है, जो सीमित अवसरों के कारण अपनी पढ़ाई बीच में छोडऩे पर मजबूर हो गई हैं। जिसके चलते बेटियों के सपने टूटते नजर आ रहे हैं। सिरसा-फतेहाबाद और आस-पास के क्षेत्रों की कई योग्य छात्राएं, जो नेट या जेआरएफ जैसी प्रतिष्ठित राष्ट्रीय परीक्षाएं पास कर चुकी हैं, परंतु सीडीएलयू के मनमाने नियमों के चलते उन्हें दूसरे राज्यों की तरफ रूख करना पड़ा और कुछ ने पारिवारिक कारणों से पढ़ाई रोक दी, तो कुछ ने अपने सपनों को परिस्थितियों में दबा दिया, सिर्फ इसलिए कि उनके विश्वविद्यालय ने उन्हें मार्गदर्शन का अवसर नहीं दिया।
अधिवक्ताओं का पक्ष:
अधिवक्ता उत्कर्ष श्योराण ने दलील दी कि यह मामला सिर्फ नियमों का नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य और बेटियों के सपनों का है। जब हरियाणा के अन्य विश्वविद्यालयों ने यूजीसी नियमों को स्पष्ट रूप से लागू कर दिया है, तो सिरसा के छात्रों को इस लाभ से क्यों वंचित किया जा रहा है? संविधान में शिक्षा का अधिकार प्रत्येक व्यक्ति के लिए समान रूप से उपलब्ध है। पिटीशनर पक्ष की अधिवक्ता सनोवर कस्वां ने दलील दी कि जो छात्र व छात्राएं आज भी सीमित संसाधनों के बावजूद ज्ञान की लौ जलाए बैठे हैं, वे सिर्फ़ एक अवसर चाहते हैं, आगे बढऩे और अपनी पहचान बनाने का। न्यायालय का यह कदम सिरसा और फतेहाबाद के छात्रों के लिए एक नई सुबह लेकर आएगा।
क्या है छात्रों की प्रतिकिया:
सीडीएलयू के छात्र संगठन डीएएसएफआई के अध्यक्ष रवि खनगवाल ने कहा कि विश्वविद्यालय की यह नीति सिरसा की शिक्षा व्यवस्था को ठहराव की ओर ले जा रही है। हमारा कसूर बस इतना है कि हम छोटे शहरों से हैं, पर हमारे सपने उतने ही बड़े हैं, जितने किसी महानगर के छात्र के। अब जब हरियाणा उच्च न्यायालय ने इस मामले को गंभीरता से लिया है, तो उम्मीद है कि जल्द ही ग्रामीण और महिला शोधार्थियों के लिए नए अवसरों के द्वार खुलेंगे। सीडीएलयू और आसपास के जिलों के छात्र अब अपने सपनों को नई उड़ान दे सकेंगे। वो सपने जो शिक्षा, आत्मनिर्भरता और समानता के रंगों से सजे हैं।
हाई कोर्ट ने किया सीडीएलयू सिरसा से जवाब-तलब
Facebook
Twitter
WhatsApp
jantareporter
The specified slider does not exist.
टॉप स्टोरी
पंचांग
Powered by Astro-Vision
Gold & Silver Price
Popular Metal Prices
ज़रूर पढ़ें
चेक बाउंस मामले में पीओ महिला आरोपी प्रोडक्शन वारंट पर गिरफ्तार ।
September 29, 2026

नाबालिग लड़की के अपहरण व दुष्कर्म मामले में आरोपी गिरफ्तार ।
September 29, 2026