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कमेटी से विचार-विमर्श के बाद ही मंदिर के जीर्णोद्धार का लिया निर्णय: राजेंद्र रातुसरिया

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सिरसा। शहर की प्राचीन श्री गौशाला में पूर्व में बने शिवालय का जीर्णोद्धार कर नवनिर्माण करने के मामले में श्री गौशाला के प्रधान राजेंद्र रातुसरिया ने मीडिया से मुखातिब होते हुए कहा कि श्री गौशाला में पुराने समय में शिवालय बना हुआ था। समय के साथ-साथ जनसंख्या बढ़ी और मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या में भी इजाफा हुआ। इसी बात को मद्देनजर रखते हुए कमेटी की ओर से निर्णय लिया गया कि यहां बड़ा व भव्य मंदिर बनाया जाए। हालांकि इस बाबत कमेटी सदस्यों को अवगत करवा दिया गया था कि 23 नवंबर को मंदिर का निर्माण कार्य शुरू करना है, लेकिन उसके बाद भी कुछ लोगों द्वारा इसके निर्माण पर एतराज जताया गया है। अगर लोग नहीं चाहते तो वे निर्माण नहीं करेंगे। गौशाला के सचिव प्रेम कंदोई ने बताया कि श्रद्धालुओं की संख्या बढऩे से मंदिर छोटा पड़ रहा था। यही नहीं मंदिर का लेवल भी नीचा था, जिसके कारण बरसात के समय में पानी भर जाता था। उन्होंने बताया कि पूर्व में बने शिवालय के स्थान पर अब बड़ा मंदिर, जिसमें रामदरबार, बांके बिहारी, शिवालय व लक्ष्मी माता का भव्य मंदिर बनाने की योजना थी। एक साहुवाला परिवार है, जो इसके निर्माण पर आपत्त्ति जता रहा है। अमित साहुवाला, जोकि गौशाला सदस्य हैं, ने स्वयं मंदिर निर्माण के लिए मंत्रोचारण के साथ पूजा करवाई थी। जबकि मंदिर के निर्माण को अशोक साहुवाला को पहले ही सूचना दे दी गई थी। दो-तीन बार बैठक भी हो चुकी है। कंदोई ने कहा कि पूर्व में जिन समाजसेवी लोगों के पत्थर लगे हुए हैं, जीणोद्धार में वो पत्थर बकायदा पहले की भांति लगाए जाएंगे। इसके बाद भी अगर निर्माण कार्य रोकना है, तो वे समस्त कमेटी सदस्यों के आने तक निर्माण कार्य रोक देते हंै। वाद-विवाद वाली इसमें कोई बात नहीं है। इस मौके पर सुरेंद्र बांसल एडवोकेट, दीन दयाल कंदोई एडवोकेट, नवीन केडिया, हनुमानदास बांसल, महेश सुरेकां वाले, विजय गोयल, संजय मित्त्तल, राजेश गर्ग, बाबूलाल मित्तल, ओमप्रकाश मेहता सहित श्रद्धालुगण उपस्थित थे।

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