सिरसा। प्रभु रामलाल नर सेवा नरायण सेवा योग ट्रस्ट हुडा-सेक्टर-20, पार्ट-3 में उपस्थित श्रद्धालुओं को मासांत सत्संग के पवित्र मौके पर योग गुरु रघुबीर महाराज ने अपने सम्बोधन में फरमाया कि मनुष्य जीवन के चार पुरषार्थ हैं। धर्म, अर्थ, काम व मोक्ष। महापुरूषों के अनुसार अर्थ और काम से संसार चलता है, पैसा आने से मनुष्य अपनी इच्छाएं पूर्ण कर लेता है। जैसे बच्चों को पढ़ाना है, लक्ष्मी भी शादी करनी है, कार खरीदनी है आदि। एक इच्छा पूर्ण होने पर अनेक इच्छाओं को जन्म देती है। किसी ने सच ही कहा है कि इच्छा कदे वन्दे दियां होंदिया नहीं पूरियां, कल्पदा बथरो पर रंहदिया अधुरियां। महापुरूषों का फरमान है कि धर्म के परम पवित्र पथ पर चल कर मनुष्य मोक्ष को प्राप्त कर सकता है। अर्थ और काम के पथ पर चल मनुष्य कभी भी जन्म-मरण के चक्कर से मुक्त नहीं हो सकता। कभी भी आनन्द व परम शांति को नहीं प्राप्त कर सकता। धर्म और मोक्ष के पथ पर चल कर मनुष्य चारों पदार्थों अर्थात धर्म, अर्थ, काम व मोक्ष को प्राप्त कर सकता है। मनुष्य जन्म ही एक सुन्दर व पवित्र मौका है, जिसमें वह मोक्ष को प्राप्त कर सकता है। रघुवीर महाराज ने आगे फरमाया कि जैसा कि श्री गुरु ग्रन्थ साहिब में सत्य ही फरमाया है कि भई प्राप्त मानुख देहुरिया, गोबिन्द मिलन की ऐह तेरी बरिया और काज तेरे किसे न काम, मिल साध-संगत भज केवल नाम। नाम अमृत का निश दिन जयकार के मनुष्य जन्म-मरण से छुट सकता है। परमानन्द व मोक्ष को प्राप्त कर सकता है। जो लोग नाम जप नहीं करते उनका जन्म-मरण के चक्कर में फसने के सिवाय और कोई रास्ता नहीं है। इस मौके पर शक्ति चावला, पृथ्वी सिंह बैनीवाल, यश चावला योगाचार्य, अमित नरूला, अरुण चौधरी, जामीत, स्वर्णा, राजेन्द्र, अयान चावला, जगननाथ मोंगा, राज चावला, पुष्कर, विजय, अंकिता, सुलोचना, आरशीया मौजूद थे।
धर्म के मार्ग पर चलकर हो सकती है मोक्ष की प्राप्ति: रघुबीर महाराज
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