सिरसा। सिविल सर्जन सिरसा डा. पवन कुमार के निर्देशानुसार जिला सिरसा में अंतर्राष्ट्रीय मादक द्रव्य दुरुपयोग एवं अवैध तस्करी विरोधी दिवस के अवसर पर भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा संचालित नशा मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत जिला मानसिक स्वस्थ्य एवं नशा मुक्ति कार्यक्रम की टीम के सदस्य के द्वारा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) माधोसिंघाना में एक व्यापक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य आमजन, विशेषकर युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों एवं मादक पदार्थों की अवैध तस्करी से होने वाले सामाजिक नुकसान के प्रति जागरूक करना था। शिविर के दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीम के सदस्य अजय सिंह ने उपस्थित लोगों को बताया कि वर्तमान समय में शराब, अफीम, हेरोइन (चिट्टा), स्मैक, गांजा, भुक्की, तंबाकू, गुटखा, सिगरेट तथा विभिन्न प्रकार के नशीले पदार्थ युवाओं को तेजी से अपनी गिरफ्त में ले रहे हैं। नशे की लत व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक, सामाजिक एवं आर्थिक जीवन को बुरी तरह प्रभावित करती है। विशेषज्ञों ने बताया कि नशीले पदार्थों का सेवन करने से हृदय रोग, फेफड़ों के रोग, लीवर की बीमारी, कैंसर, उच्च रक्तचाप, मस्तिष्क संबंधी विकार, स्मरण शक्ति में कमी, अवसाद, चिंता, आत्महत्या की प्रवृत्ति तथा विभिन्न मानसिक रोगों का खतरा बढ़ जाता है। लंबे समय तक नशा करने वाले व्यक्तियों में निर्णय लेने की क्षमता कमजोर हो जाती है और उनका व्यवहार असामान्य हो सकता है। शिविर में यह भी बताया गया कि नशे का प्रभाव केवल व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसका परिवार भी गंभीर रूप से प्रभावित होता है। नशे की लत के कारण पारिवारिक कलह, घरेलू हिंसा, आर्थिक तंगी, बच्चों की शिक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव तथा सामाजिक प्रतिष्ठा में गिरावट जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। कई मामलों में नशे की पूर्ति के लिए व्यक्ति अपराध की ओर अग्रसर हो जाता है, जिससे समाज में अपराध दर बढ़ती है। कार्यक्रम के दौरान मादक पदार्थों की अवैध तस्करी के दुष्परिणामों पर भी चर्चा की गई। वक्ताओं ने बताया कि अवैध नशा तस्करी युवाओं के भविष्य को बर्बाद करने के साथ-साथ कानून व्यवस्था के लिए भी गंभीर चुनौती है। नशे का कारोबार समाज में अपराध, हिंसा और असामाजिक गतिविधियों को बढ़ावा देता है। इसलिए प्रत्येक नागरिक का दायित्व है कि वह नशा तस्करी संबंधी किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना संबंधित विभाग को दें।
स्वास्थ्य अधिकारियों ने उपस्थित लोगों को बताया कि नशा एक बीमारी है, जिसका उपचार संभव है। यदि कोई व्यक्ति नशे की समस्या से जूझ रहा है तो उसे छिपाने के बजाय चिकित्सकीय सहायता एवं परामर्श प्राप्त करना चाहिए। नशा मुक्ति केंद्रों में विशेषज्ञ चिकित्सकों, मनोवैज्ञानिकों एवं परामर्शदाताओं द्वारा उपचार एवं पुनर्वास सेवाएं उपलब्ध करवाई जाती हैं। इस अवसर पर उपस्थित लोगों को नशा मुक्त भारत अभियान के उद्देश्यों से अवगत करवाया गया तथा नशे से दूर रहने और दूसरों को भी जागरूक करने की शपथ दिलाई गई। प्रतिभागियों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने, खेलकूद एवं सकारात्मक गतिविधियों में भाग लेने तथा समाज को नशा मुक्त बनाने में सक्रिय योगदान देने के लिए प्रेरित किया गया। कार्यक्रम के अंत में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने संदेश दिया कि नशे को ना कहें, जीवन को हां कहें तथा एक स्वस्थ, सुरक्षित और नशा मुक्त समाज के निर्माण में सभी नागरिकों की सहभागिता आवश्यक है।
अवैध नशा तस्करी कानून व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौति: अजय सिंह
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