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आज के बच्चे ही कल के राष्ट्र निर्माता: सेठी

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-सेवा संकल्प अभियान के तहत संगम स्कूल भरोखां में चित्रकला प्रतियोगिता आयोजित
-सैकड़ों विद्यार्थियों ने चित्रों के माध्यम से सशक्त, आत्मनिर्भर एवं विकसित भारत का सपना किया साकार
सिरसा। सशक्त, आत्मनिर्भर एवं विकसित भारत तथा राष्ट्र निर्माण के सपनों को साकार करने के उद्देश्य से चलाए जा रहे सेवा संकल्प अभियान के तहत संगम स्कूल भरोखां में चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में कक्षा पहली से आठवीं तक के सैकड़ों विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए अपनी रचनात्मक प्रतिभा और कल्पनाशीलता का परिचय दिया। प्रतियोगिता के दौरान विद्यार्थियों ने रंगों और चित्रों के माध्यम से राष्ट्र निर्माण, आत्मनिर्भरता, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, सेवा भावना तथा विकसित भारत जैसे विभिन्न विषयों को आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया। नन्हे विद्यार्थियों द्वारा बनाए गए चित्रों में देश के प्रति प्रेम, समाज के प्रति जिम्मेदारी और बेहतर भविष्य की कल्पना स्पष्ट रूप से दिखाई दी। प्रतियोगिता के उपरांत विद्यालय परिसर में विद्यार्थियों द्वारा तैयार की गई कलाकृतियों की चित्र प्रदर्शनी भी लगाई गई। प्रदर्शनी में अनेक अभिभावकों ने पहुंचकर बच्चों की रचनात्मक प्रतिभा को देखा और उनकी कलाकृतियों की सराहना की। अभिभावकों ने कहा कि इस प्रकार की गतिविधियां बच्चों को अपनी प्रतिभा अभिव्यक्त करने के साथ-साथ सामाजिक एवं राष्ट्रीय विषयों के प्रति जागरूक बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों में दिलराज सिंह संधू और वर्षा फ्रंड ने संयुक्त रूप से प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि हिमांशु ढाका और काव्य वर्मा ने संयुक्त रूप से द्वितीय स्थान हासिल किया। विजेता विद्यार्थियों को विद्यालय की ओर से सम्मानित किया गया। विजेताओं को सम्मानित करते हुए विद्यालय के मुख्य अध्यापक छगन सेठी ने कहा कि सेवा संकल्प अभियान की पहली कड़ी के रूप में विद्यालय में चित्रकला प्रतियोगिता आयोजित की गई है। इसके माध्यम से बच्चों को अपनी कला एवं कल्पना को अभिव्यक्त करने का अवसर देने के साथ-साथ उन्हें राष्ट्र निर्माण के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया गया है। उन्होंने कहा कि बच्चों के मन में बचपन से ही सेवा, संस्कार, जिम्मेदारी और राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना विकसित करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आज के बच्चे ही कल के भारत का निर्माण करेंगे। यदि विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ-साथ रचनात्मकता, सेवा भावना और सामाजिक सरोकारों से जोड़ा जाए तो वे भविष्य में एक सशक्त, आत्मनिर्भर और विकसित राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। विद्यालय प्रबंधन की ओर से

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