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मन ही मनुष्य के जन्म-मरण का प्रमुख कारण

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सिरसा। योग योगेश्वर महाप्रभु रामलाल महाराज के शुभ अवतरण दिवस समारोह के शुभ अवसर पर योग गुरु रघुबीर महाराज ने प्रभु रामलाल नर सेवा नारायण सेवा योग ट्रस्ट हुडा, सिरसा सेक्टर-20 पार्ट-111 भवन नंबर 2266 में उपस्थित श्रद्धालुओं को अपने सम्बोधन में फरमाया कि मन एवं मनुष्यणाम कारणं बन्धमोक्ष:। अर्थात मन ही मनुष्य के जन्म-मरण का कारण है, जन्म-मरण को मुस्लिम धर्म में दोजक कहा हैं। मन ही मनुष्य को मुक्ति व मोक्ष की ओर ले जाता है। रघुबीर महाराज ने कहा कि ऐसा क्या कारण है कि मन ही मनुष्य के जन्म मरण व मोक्ष का कारण है। यह बहुत ही ध्यान देने योग्य बात है। तन स्थूल है, जड़ हैं। तन-मन के ईशारे पर चलता है। मन का अर्थ है विचार व सोच। जैसे मनुष्य के विचार होंगे वैसा ही मनुष्य बनेगा। मन अपनी चंचलता के कारण जाना जाता है। यह मनुष्य को चल-चल कहता है। यह मनुष्य को बाहरी विषयों की ओर दौड़ाए रखता है। विषय है, शब्द, स्पर्श, रूप, रस और गन्ध। इन्हीं से ही मन को क्षण भंगूर सुख मिलता है। क्षण भंगूर सुखों के लिये मनुष्य अपना जीवन बर्बाद कर देता है और जन्म-मरण के चक्कर में फंस जाता है।
रघुवीर महाराज ने आगे फरमाया कि जन्म-मरण के चक्कर से बचने के लिये योग मत, सिख मत, सनातन मत यह कहता है कि भव को नियंत्रण में करना चाहिए। विश्व में ऐसा कोई स्थान नहीं, तीर्थ नहीं जहां पर जाने से मन नियन्त्रण में हो जाता है। मन को नियंत्रण में करने के लिए मनुष्य को अपने मन को परमात्मा से, ईश्वर से जोडऩा होगा। ऐसा निरंतर अभ्यास करने से मन अपनी चंचलता छोड़ देता है और मन निर्मल और पवित्र हो जाता है। ईश्वर कहीं दूर नहीं, वह प्रत्येक प्राणी के भीतर और धरती के कण-कण में है। ध्यान के अभ्यास में, शब्द सूरत योग से ईश्वर भीतर प्रकट हो जाता है। फिर साधक ईश्वर को ऐसे देख सकता है, जैसे हाथ पर रखा हुआ आंवला। तत्व ज्ञान व आत्म ज्ञान में मनुष्य मोक्ष को प्राप्त होता है। इस पवित्र मौके पर शक्ति चावला, यश चावला योगाचार्य, केवल ठकुराल, पृथ्वी बैनीवाल, लक्ष्य, अरुण चौधरी, रामस्वरूप, भाल सिंह, सतीश, रमेश, सन्नी, सुरेन्द्र सिंह, अयान, मुकेश, मीनाक्षी, फूलरानी, संगीता, ऊषा, गौरी, मेघा आदि उपस्थित थे।

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