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जिले में संचालित होने वाले सभी प्राइवेट प्ले स्कूलों के लिए रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य है। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) की गाइडलाइन के अनुसार बिना रजिस्ट्रेशन के कोई भी प्राइवेट प्ले स्कूल संचालित नहीं हो सकता। इस नियम का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
महिला एवं बाल विकास विभाग की उप निदेशक कम जिला कार्यक्रम अधिकारी डॉ. दर्शना सिंह ने बताया कि जिला में चल रहे सभी प्राइवेट प्ले स्कूलों को एनसीपीसीआर की गाइडलाइन के तहत रजिस्ट्रेशन करवाना होगा। पहले से रजिस्टर्ड प्ले स्कूलों को भी हर साल अपनी मान्यता का नवीनीकरण (रिन्यूअल) करवाना अनिवार्य है। यदि कोई स्कूल बिना रजिस्ट्रेशन के संचालित पाया गया, तो उसे बच्चों का दाखिला करने से प्रतिबंधित भी किया जाएगा।
महिला एवं बाल विकास विभाग की उप निदेशक कम जिला कार्यक्रम अधिकारी डॉ. दर्शना सिंह ने बताया कि जिला में चल रहे सभी प्राइवेट प्ले स्कूलों को एनसीपीसीआर की गाइडलाइन के तहत रजिस्ट्रेशन करवाना होगा। पहले से रजिस्टर्ड प्ले स्कूलों को भी हर साल अपनी मान्यता का नवीनीकरण (रिन्यूअल) करवाना अनिवार्य है। यदि कोई स्कूल बिना रजिस्ट्रेशन के संचालित पाया गया, तो उसे बच्चों का दाखिला करने से प्रतिबंधित भी किया जाएगा।
डॉ. दर्शना सिंह ने बताया कि यदि कोई प्ले स्कूल बच्चों को वैन या अन्य वाहन सुविधा प्रदान करता है, तो उसे क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) से सहमति और रूट पास लेना अनिवार्य होगा। इसके अलावा, प्ले स्कूल केवल 3 से 6 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए ही मान्य होंगे। स्कूल संचालकों को सुरक्षा, रजिस्ट्रेशन प्रमाण पत्र, जमीन के दस्तावेज, भवन निर्माण, फायर सेफ्टी, चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) की रिपोर्ट और सभी स्टाफ की पुलिस वेरिफिकेशन जैसे नियमों का पालन करना होगा। साथ ही, स्कूल के नाम में ‘प्ले स्कूल’ शब्द का होना भी अनिवार्य है।
उन्होंने बताया कि एनसीपीसीआर और शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) की धारा 17 के तहत, किसी भी सरकारी या प्राइवेट प्ले स्कूल में बच्चों को मानसिक या शारीरिक दंड देना दंडनीय अपराध है। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों का दाखिला करवाने से पहले प्ले स्कूल का रजिस्ट्रेशन अवश्य जांच लें। साथ ही, उन्होंने प्राइवेट प्ले स्कूल संचालकों को निर्देश दिए कि वे 30 मई 2025 तक अपने स्व-रजिस्ट्रेशन से संबंधित सभी दस्तावेज संबंधित कार्यालय में जमा करवाएं।
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व्यापारियों के लिए हरियाणा सरकार की एक मुश्त समाधान योजना का ऐलान
हरियाणा सरकार ने व्यापारियों को बड़ी राहत देने के उद्देश्य से एक मुश्त समाधान योजना शुरू की है। यह योजना व्यापारियों के लिए पिछली योजनाओं से कहीं अधिक लाभकारी होगी और बकाया कर, ब्याज व जुर्माने से छुटकारा पाने का सुनहरा अवसर प्रदान करेगी। यह जानकारी उप आबकारी एवं कराधान आयुक्त (बिक्री कर) अंजू सिंह ने देते हुए बताया कि इस योजना से व्यापारियों को बकाया कर की राशि चुकाने में मदद मिलेगी। यदि किसी व्यापारी का बकाया कर एक लाख रुपये तक है, तो उसका पूरा कर, ब्याज और जुर्माना माफ कर दिया जाएगा। वहीं, एक लाख से दस लाख रुपये तक के बकाया कर वाले व्यापारियों को ब्याज और जुर्माने की पूरी छूट मिलेगी, साथ ही एक लाख रुपये की कर छूट भी दी जाएगी। इस स्थिति में शेष कर का केवल 40 प्रतिशत भुगतान करना होगा।
उन्होंने बताया कि दस लाख से दस करोड़ रुपये तक के बकाया कर पर भी ब्याज और जुर्माने की पूरी माफी के साथ एक लाख रुपये की कर छूट का लाभ मिलेगा। ऐसे मामलों में व्यापारियों को शेष कर का 50 प्रतिशत अदा करना होगा। वहीं, दस करोड़ रुपये से अधिक के बकाया कर की स्थिति में ब्याज और जुर्माने को पूरी तरह माफ किया जाएगा, लेकिन शेष कर की पूरी राशि जमा करनी होगी। उन्होंने सभी व्यापारियों से इस योजना का अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील की।
उन्होंने बताया कि एनसीपीसीआर और शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) की धारा 17 के तहत, किसी भी सरकारी या प्राइवेट प्ले स्कूल में बच्चों को मानसिक या शारीरिक दंड देना दंडनीय अपराध है। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों का दाखिला करवाने से पहले प्ले स्कूल का रजिस्ट्रेशन अवश्य जांच लें। साथ ही, उन्होंने प्राइवेट प्ले स्कूल संचालकों को निर्देश दिए कि वे 30 मई 2025 तक अपने स्व-रजिस्ट्रेशन से संबंधित सभी दस्तावेज संबंधित कार्यालय में जमा करवाएं।
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व्यापारियों के लिए हरियाणा सरकार की एक मुश्त समाधान योजना का ऐलान
हरियाणा सरकार ने व्यापारियों को बड़ी राहत देने के उद्देश्य से एक मुश्त समाधान योजना शुरू की है। यह योजना व्यापारियों के लिए पिछली योजनाओं से कहीं अधिक लाभकारी होगी और बकाया कर, ब्याज व जुर्माने से छुटकारा पाने का सुनहरा अवसर प्रदान करेगी। यह जानकारी उप आबकारी एवं कराधान आयुक्त (बिक्री कर) अंजू सिंह ने देते हुए बताया कि इस योजना से व्यापारियों को बकाया कर की राशि चुकाने में मदद मिलेगी। यदि किसी व्यापारी का बकाया कर एक लाख रुपये तक है, तो उसका पूरा कर, ब्याज और जुर्माना माफ कर दिया जाएगा। वहीं, एक लाख से दस लाख रुपये तक के बकाया कर वाले व्यापारियों को ब्याज और जुर्माने की पूरी छूट मिलेगी, साथ ही एक लाख रुपये की कर छूट भी दी जाएगी। इस स्थिति में शेष कर का केवल 40 प्रतिशत भुगतान करना होगा।
उन्होंने बताया कि दस लाख से दस करोड़ रुपये तक के बकाया कर पर भी ब्याज और जुर्माने की पूरी माफी के साथ एक लाख रुपये की कर छूट का लाभ मिलेगा। ऐसे मामलों में व्यापारियों को शेष कर का 50 प्रतिशत अदा करना होगा। वहीं, दस करोड़ रुपये से अधिक के बकाया कर की स्थिति में ब्याज और जुर्माने को पूरी तरह माफ किया जाएगा, लेकिन शेष कर की पूरी राशि जमा करनी होगी। उन्होंने सभी व्यापारियों से इस योजना का अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील की।
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