सिरसा। प्रभु राम लाल नर सेवा नरायण सेवा योग ट्रस्ट हुडा, सिरसा सेक्टर-20 पार्ट में मासांत सत्संग के अवसर पर योग गुरु रघुबीर महाराज ने उपस्थित श्रद्धालुओं को अपने सम्बोधन में फरमाया कि संसार में मुख्य दो प्रकार की पूजा है। पहली बाहरी पूजा और दूसरी आन्तरिक पूजा, अर्थात नाम जप की पूजा। बाहरी पूजा में मूर्ति, थाली, जोत घी, बाती माचिस की जरूरत होती है, बाहरी पूजा करने से मनुष्य को
कुछ सुख मिलता है, योग्य पदार्थ मिलते हंै। जिससे उसके सांसारिक काम चलते रहते हैं, पर उसे शांति और आनन्द नहीं मिलता। बाहरी पूजा से चिंताएं भी दूर नहीं होती। आंतरिक पूजा करने से अर्थात नाम जप करने से साधक की चंचलता दूर होती है। साधक का मन नियंत्रण में आ जाता है। बाहरी पूजा करने से मन कभी भी नियंत्रण में नहीं आता। मन की चंचलता बाहरी पूजा से दूर नहीं होती। रघुबीर महाराज ने आगे फरमाया कि आन्तरिक पूजा अर्थात नाम जब की महिमा का वर्णन करते हुए भगवान शंकर जगत जननी मां पार्वती से फरमाते हैं, गुरु का नाम जपे दिन रात, गुरु बिन भावे और न बात। साधक के मन में वैराग्य होना चाहिए। वह दिन-रात भगवान का नाम जपेए, उसे संसार की अन्य कोई बात अच्छी नहीं लगनी चाहिए । वह श्वास-श्वास गुरु के मंत्र को जपे। उसका कोई भी श्वास खाली नहीं जाना चाहिए। श्वास-श्वास जप करने से साधक का मन स्थिर हो जाएगा, उसकी चंचला नष्ट हो जायेगी। परिणामस्वरूप उसे शांति और परमानन्द प्राप्त होगा। बाहरी पूजा से शान्ति और परमानन्द मिलना असंभव है। बाहरी पूजा से नाम जप की पूजा श्रेष्ठ है। दिन रात नाम जप की पूजा कर अपना जीवन सफल बनाएं। इस पवित्र मौके पर शक्ति चावल, यश चावला योगाचार्य, पृथ्वी सिंह बैनीवाल, सुरेन्द्र नामधारी, लक्ष्य, राज चावला, अयान, रवि मोंगा, मास्टर जितेन्द्र, रामस्वरूप मेहता, रशमी, अंकिता, हरसिमरन, गोरी, गरिमा, आरशिया आदि भक्त मौजूद थे।
आतंरिक पूजा से मिलती है असीम शांति
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