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धान,बाजरा सहित विभिन्न फसलों की खरीद में भी हुई धांधली, आंकड़ों में किया हेर फेर : डॉ केवी सिंह
वरिष्ठ कांग्रेस नेता डॉ केवी सिंह ने सरकार के फसल के दाने-दाने खरीदने के दावों को हवा हवाई बताते हुए सरकार के खरीद सिस्टम की पोल खोली है।
एक प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए डॉ सिंह ने कहा कि जहां सरकार किसानों की फसल के एक-एक दाने को खरीदने की बात कहती थी, वही सच्चाई इससे कोसों दूर है और सरकार द्वारा बाजरा,मूंग,कपास की फसल की नाम मात्र खरीद की गई है, जिससे किसान पर दोहरी मार पड़ी है। उन्होंने कहा कि अत्यधिक बारिश से जूझ रहे किसानों को उम्मीद थी कि उनकी शेष बची बाजरा, मूंग,धान,मक्का सहित अधिकांश फसलों पर उन्हें एमएसपी मिलेगी लेकिन हालात उस विपरीत हैं।
डॉ सिंह ने कहा कि बाजरे का एमएसपी 2775 रुपए निर्धारित है जिसके तहत बाजरे को 2200 रुपए के हिसाब से प्राइवेट एजेंसी खरीदेगी और भावांतर योजना का 575 रुपए सरकार द्वारा किसानों के खाते में डाला जाएगा। उन्होंने कहा है इसके विपरीत प्राइवेट एजेंसियां बाजरे को 2200 रुपए की बजाय केवल 1700-1800 रूपये में खरीद रहीं है, जिस कारण भावांतर योजना के पैसे भी किसानों को नहीं मिल पा रहे और धोखेबाज लोग फर्जी पंजीकरण के जरिए करोड़ों रुपए की रकम को हड़प रहे है।डॉ केवी सिंह ने कहा कि फूड सप्लाई विभाग के आंकड़ों से पता चलता है कि बाजरे की कुल आवक 5.89 लाख मैट्रिक टन थी जबकि 8 नवंबर सुबह तक उसमें से केवल 146.40 मीट्रिक टन की ही खरीद हो पाई है।
इसी प्रकार से डॉ सिंह ने मूंग के बारे में बताया कि एजेंसियों द्वारा अब तक मूंग का एक भी दाना नहीं खरीदा गया है जिसके चलते किसानों में मायूसी छाई पड़ी है। उन्होंने बताया कि अभी तक 2.4 मीट्रिक टन मक्का की खरीद सरकार द्वारा की गई है जबकि आवक इससे कई लाख मीट्रिक टन ज्यादा हुई है।
डॉ सिंह ने बताया कि 3.8 लाख हैक्टेयर भूमि में कपास का उत्पादन किया गया है जबकि खरीद उससे बहुत कम की गई है। उन्होंने बताया कि जहां 28 एम एम कपास का एमएसपी 8910 रुपए था वहीं किसानों को मजबूरन 6500-6600 के दाम पर अपनी फसल को बेचने के लिए विवश होना पड़ा।
डॉ केवी सिंह ने कहा कि धान की खरीद में आंकड़ों का हेर फेर करके बड़े घोटाले को अंजाम दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि धान की आवक 59.03 लाख मैट्रिक टन दर्ज की गई, जबकि खरीद फॉर्म जे के अनुसार खरीद 61.09 लाख मीट्रिक टन दर्शाई गई है और उठान का आंकड़ा 59 लाख 80 हजार मीट्रिक टन दिखाया गया है, जिससे पता चलता है कि इस खरीद में बड़े घोटाले को अंजाम दिया गया है।
डॉ सिंह ने कहा कि सरकार को झूठे दावों से बाहर निकलते हुए आमजन को सच्चाई बतानी चाहिए ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।
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