सिरसा। किसानों को समृद्ध एवं खुशहाल बनाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा उपयोग किए जा रहे एआई फंड को लेकर प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य एवं जिला प्रवक्ता भाजपा डा. गंगासागर केहरवाला ने कहा कि इससे देश के सभी राज्यों में बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित होगा और किसान भी आर्थिक रूप से सशक्त होगा। जारी बयान में डा. केहरवाला ने कहा कि हरियाणा ने एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड का लक्ष्य के अनुसार उपयोग किया है और ज्यादा से ज्यादा किसानों को लाभान्वित किया है। सरकार कृषि क्षेत्र की समस्याएं हल करने, खेती की पैदावार बढ़ाने, खेती को टिकाऊ बनाने और किसानों की आय सुधारने के लिये आर्टिफिशियल इंटेलिजेन्स यानी एआई का उपयोग कर रही है। इसी उद्देश्य से डवेलपमेंट इनोवेशन लैब-इंडिया के साथ मिलकर एक एआई-आधारित परीक्षण किया गया। इसके तहत खरीफ -2025 के लिये 13 राज्यों के कुछ क्षेत्रों में स्थानीय मानसून आने के समय का पूर्वानुमान तैयार किया गया। डा. केहरवाला ने कहा कि इसमें न्यूरल-जीसीएम, यूरोपीय सेंटर फॉर मीडियम-रेंज वेदर फोरकास्ट्स यानी ईसीएमडब्ल्यूएफ का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस फोरकास्टिंग सिस्टम (एआईएफएस) प्रणाली और भारतीय मौसम विभाग के 125 वर्ष के वर्षा आंकड़े शामिल किए गए। ये पूर्वानुमान केवल इस बात की सम्भावना बताते थे कि आपके क्षेत्र में मानसून कब शुरू होगा। यह जानकारी किसानों के लिए इसलिए जरूरी है, क्योंकि इसी के आधार पर बुवाई की तिथि तय होती है। सर्वे में पाया गया कि लगभग 31 से 52 प्रतिशत किसानों ने इन पूर्वानुमानों के आधार पर अपनी बुवाई की योजनाएं बदलीं। इसमें जमीन की तैयारी, बुवाई के समय, फसल चयन और अन्य आवश्यक इनपुट बदलना शामिल था। इसके अलावा किसान ई-मित्र नाम का एक वॉयस-बेस्ड एआई चैटबॉट बनाया गया है। यह किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि, पीएम फसल बीमा योजना और किसान क्रेडिट से संबंधित उनके सवालों के जवाब देने में मदद करने के लिए विकसित किया गया है। डा. केहरवाला ने बताया कि यह एआई उपकरण 10000 से अधिक कृषि विस्तार कर्मियों द्वारा उपयोग किया जा रहा है। किसान किसी कीट की तस्वीर खींचकर भेजते हैं और यह प्रणाली कीट की पहचान कर समाधान सुझाने में मदद करती है। इससे कीट प्रकोप और फसल हानि कम होती है। यह प्रणाली 66 फसलों और 432 से अधिक प्रकार के कीटों पर किसानों को सपोर्ट करती है। सैटेलाइटआधारित फसल मैपिंग के लिए फील्ड तस्वीरों का इस्तेमाल करके एआई-आधारित एनालिटिक्स का इस्तेमाल बोई गई फसलों की फसल-मौसम मैचिंग मॉनिटरिंग में किया जा रहा है। कुल मिलाकर सरकार खेती को आसान बनाने व किसानों को अधिक मुनाफा देने के लिए अनेक आधुनिक तकनीकें अपना रही है, जिससे देश का किसान सुदृढ़ व लाभांवित हुआ है।
एआई फंड से अन्नदाता होगा आर्थिक रूप से सशक्त: डा. गंगासागर केहरवाला
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