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शिक्षा मंत्री से सरकारी स्कूलों की एसएमसी व्यवस्था में बड़े सुधार की मांग

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नरेंद्र पारीक ने भेजा विस्तृत सुझाव पत्र, एसएमसी सदस्यों के लिए शैक्षणिक योग्यता व मासिक मानदेय लागू करने की उठाई मांग
सिरसा। सरकारी विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता एवं विद्यालय प्रबंधन को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से सामाजिक कार्यकर्ता एवं आरटीआई कार्यकर्ता नरेंद्र पारीक ने हरियाणा के शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा को एक विस्तृत सुझाव-पत्र भेजकर स्कूल मैनेजमेंट कमेटी (एसएमसी) व्यवस्था में व्यापक सुधार करने की मांग की है। पत्र में कहा गया है कि वर्तमान समय में अधिकांश सरकारी विद्यालयों में गठित एसएमसी केवल औपचारिकता बनकर रह गई है। अनेक स्थानों पर समिति की बैठकों में केवल हस्ताक्षर पूरे कर दिए जाते हैं, जबकि अधिकांश सदस्यों को विद्यालय के विकास, बजट, शिक्षा विभाग के नियमों तथा उनकी जिम्मेदारियों की पर्याप्त जानकारी नहीं होती। इससे समिति अपने वास्तविक उद्देश्य को पूरा नहीं कर पा रही है। नरेंद्र पारीक ने सुझाव दिया कि एसएमसी सदस्य बनने के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता निर्धारित की जाए, ताकि सदस्य विद्यालय से संबंधित दस्तावेजों, विकास योजनाओं तथा वित्तीय मामलों को समझ सकें और प्रभावी निर्णय ले सकें। उन्होंने यह भी मांग की कि एसएमसी सदस्यों को मासिक मानदेय या बैठक भत्ता दिया जाए, क्योंकि वर्तमान में अधिकांश सदस्य दिहाड़ी-मजदूरी अथवा अन्य कार्यों में व्यस्त रहने के कारण विद्यालय को पर्याप्त समय नहीं दे पाते। मानदेय मिलने से वे नियमित रूप से विद्यालय के विकास कार्यों की निगरानी कर सकेंगे। पत्र में यह भी प्रस्ताव रखा गया कि सभी एसएमसी सदस्यों का समय-समय पर अनिवार्य प्रशिक्षण कराया जाए, जिससे उन्हें शिक्षा का अधिकार अधिनियम, विद्यालय प्रबंधन, बजट, सरकारी योजनाओं तथा निगरानी प्रणाली की जानकारी मिल सके। उन्होंने सुझाव दिया कि एसएमसी बैठकों की डिजिटल उपस्थिति एवं वीडियो रिकॉर्डिंग की व्यवस्था लागू की जाए, ताकि केवल कागजी कार्यवाही और फर्जी बैठकों पर रोक लगाई जा सके। साथ ही प्रत्येक विद्यालय की एसएमसी की कार्यवाही एवं निर्णयों को आॅनलाइन पोर्टल पर सार्वजनिक किया जाए। नरेंद्र पारीक ने कहा कि एसएमसी को विद्यालय के विकास कार्यों, भवन निर्माण, मिड-डे मील, छात्रों की उपस्थिति, आधारभूत सुविधाओं तथा सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की नियमित निगरानी का प्रभावी अधिकार दिया जाना चाहिए। साथ ही निष्क्रिय सदस्यों को हटाकर सक्रिय एवं योग्य सदस्यों को समिति में शामिल करने की व्यवस्था भी बनाई जानी चाहिए। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि एसएमसी सदस्यों के लिए शिकायत दर्ज कराने एवं उसकी आॅनलाइन मॉनिटरिंग की व्यवस्था शुरू की जाए, जिससे विद्यालयों में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़े। पत्र में कहा गया है कि सरकार सरकारी विद्यालयों पर प्रतिवर्ष करोड़ों रुपये खर्च करती है, लेकिन यदि एसएमसी व्यवस्था मजबूत नहीं होगी तो इन संसाधनों का अपेक्षित लाभ विद्यार्थियों तक नहीं पहुंच पाएगा। एक सक्षम, प्रशिक्षित और उत्तरदायी एसएमसी सरकारी विद्यालयों की गुणवत्ता सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। अंत में नरेंद्र पारीक ने शिक्षा मंत्री से आग्रह किया कि विद्यार्थियों के हित, सरकारी विद्यालयों के विकास तथा शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए एसएमसी व्यवस्था में आवश्यक नीतिगत सुधार शीघ्र लागू किए जाएं, ताकि समिति केवल कागजों तक सीमित न रहकर विद्यालय विकास की वास्तविक भागीदार बन सके।

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