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मेघराज ठेकेदार जी की अथक महेनत से धर्मशाला का हुआ निर्माण
हरियाणा कुम्हार महासभा के पूर्व प्रधान, समाजसेवा के ध्रुवतारे और प्रेरणा के प्रतीक डॉ. छाजु राम जी से हाल ही में हुई एक हृदयस्पर्शी मुलाकात ने कुम्हार समाज के गौरवशाली इतिहास, सामाजिक एकता और उनके अटूट समर्पण की अमर गाथा को जीवंत कर दिया। इस अविस्मरणीय अवसर पर डॉ. छाजु राम जी ने प्रेमनगर धर्मशाला के निर्माण की कहानी, समाज के लिए उनके योगदान और अपनी प्रेरक जीवन यात्रा के मार्मिक पहलुओं को साझा किया, जिसने उपस्थित सभी लोगों के हृदय को गहरे तक छू लिया। ये बात वरिष्ठ भाजपा नेता हनुमान वर्मा ने प्रैस विज्ञप्ति मे कही ।
प्रेमनगर धर्मशाला समाज की एकता और संकल्प का प्रतीक है।
डॉ. छाजु राम जी ने प्रेमनगर, हिसार में 1956 में निर्मित 106 कमरों वाली भव्य धर्मशाला के निर्माण की कहानी को साझा करते हुए बताया कि इसका शिलान्यास तत्कालीन मत्स्य देश के प्रधानमंत्री श्री शोभा राम सांसद जी ने किया था। इस ऐतिहासिक कार्य में हरियाणा कुम्हार महासभा के दूसरे प्रधान श्री मेधराज जी ठेकेदार की अहम भूमिका रही। उनके साथ बेगराज पंघाल , रुलीराम , राम लाल , सुन्दर लाल जालीवाला , सुगन चंद व अनेको साथी साथ रहे थे । उन्होंने मेघराज जी के चंदा इकट्ठा करने के अनूठे और दृढ़ संकल्पित अंदाज को याद करते हुए कहा, “मेघराज जी जहां भी चंदा मांगने जाते, कभी खाली हाथ नहीं लौटे। उनका कहना था, ‘या तो पांच रुपये दे दे, या मेरी हथेली पर थू दे।’ इस जज्बे के बल पर समाज ने दो-दो, पांच-पांच रुपये इकट्ठा करके यह भव्य धर्मशाला बनाई, जो उस दौर में हिसार में किसी भी समाज की सबसे शानदार धर्मशाला थी।” यह धर्मशाला आज भी कुम्हार समाज की एकता, मेहनत और सामूहिक संकल्प की जीवंत गवाही देती है।
हरियाणा कुम्हार महासभा का गौरवशाली इतिहास है।
डॉ. छाजु राम जी ने महासभा के प्रारंभिक दिनों को याद करते हुए बताया कि कुम्हार धर्मशाला के पहले प्रधान श्री गोकल राम जी सैक्ट्री (आर्यनगर) बने थे । उनके बाद श्री मेधराज जी ठेकेदार ने नेतृत्व संभाला और फिर डॉ. छाजु राम जी स्वयं तीसरे प्रधान बने। उन्होंने गर्व के साथ साझा किया कि जब हरियाणा और पंजाब एक संयुक्त राज्य थे, तब वे पंजाब कबड्डी टीम के कप्तान रहे और खेल के मैदान में समाज का नाम रोशन किया। उनकी यह उपलब्धि न केवल व्यक्तिगत गौरव का प्रतीक है, बल्कि कुम्हार समाज की मेहनत और प्रतिभा का भी परिचायक है। अपनी व्यक्तिगत यात्रा का जिक्र करते हुए डॉ. छाजु राम जी ने बताया कि 1959-60 में वे जींद (पंजाब) के जाट हाई स्कूल में पढ़े। इस दौरान उन्होंने शिक्षा और अनुशासन के मूल्यों को आत्मसात किया, जो उनकी समाजसेवा और नेतृत्व में आधारशिला बने। उन्होंने गहरी भावना के साथ कहा, “मिट्टी को आकार देने वाला कुम्हार समाज मेहनत, सृजन और एकता का प्रतीक है। हमें अपनी इस समृद्ध विरासत को गर्व के साथ संजोना है और शिक्षा, कौशल व सामाजिक एकता के माध्यम से नई पीढ़ी को सशक्त करना है।” उनकी यह बातें समाज के प्रत्येक व्यक्ति के लिए प्रेरणा का स्रोत बनीं।
वर्मा ने बताया कि डा0 छाजु राम जी ने युवाओं से अपील की कि वे अपनी सांस्कृतिक जड़ों को मजबूत रखें और कुम्हार समाज के उत्थान के लिए एकजुट होकर कार्य करें। उनकी सादगी, दृढ़ संकल्प और समाज के प्रति निस्वार्थ सेवा का भाव उपस्थित सभी लोगों के लिए एक मिसाल बन गया। उनकी बातों में छिपा गहरा संदेश था कि समाज की प्रगति तभी संभव है, जब हम अपनी विरासत को गर्व के साथ अपनाएं और सामूहिक प्रयासों से आगे बढ़ें।
इस मुलाकात में हरियाणा कुम्हार महासभा ने डॉ. छाजु राम जी के अमूल्य योगदान, उनके द्वारा साझा किए गए ऐतिहासिक तथ्यों और उनकी प्रेरक जीवन यात्रा की सराहना की। प्रेमनगर धर्मशाला के निर्माण की कहानी और डॉ. छाजु राम जी के अनुभवों को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाने का दृढ़ संकल्प लिया गया। यह मुलाकात न केवल कुम्हार समाज, बल्कि समस्त हरियाणा के लिए एक अविस्मरणीय और प्रेरणादायक क्षण बन गई, जो आने वाली पीढ़ियों को समाजसेवा और एकता का मार्ग दिखाएगी।
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