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केवल धन, पद, प्रतिष्ठता से लक्ष्य पाना कठिन: राजयोगी सूर्या

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आनंद सरोवर में धूमधाम से मनाया श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर्व
सिरसा। ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के आनंद सरोवर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व हर्षोल्लास से मनाया गया। इस पावन अवसर पर ब्रह्माकुमारी मुख्यालय से राजयोगी बीके सूर्या, बीके गीता व बीके नितिन के अलावा आनंद सरोवर की संचालिका बीके बिंदु, बीडीपीओ नाथुसरी चौपटा स्टालिन सचदेवा, बीके पालाराम, बीके सुखपाल कौर, बीके रामनिवास के अलावा काफी संख्या में गणमान्यजन मौजूद थे। संस्थान की संचालिका बीके बिंदु ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। कृष्ण, राधा की डे्रस पहने बच्चों ने श्रीकृष्ण की लीलाओं का चित्रण करते हुए अपनी प्रस्तुतियां दी। राजयोगिनी बीके गीता ने बताया कि आज के दिन हमें श्रीकृष्ण भगवान के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए जिन्होंने आत्माओं के कल्याण के लिए अवतार लिया। उन्होंने बताया कि हम भी उसी ईश्वर के अंश हैं, इसलिए हमें भी अपने भीतर एक विशेष प्रकार की भावना और विचार विकसित करने का प्रयास करना चाहिए जिससे हमें शांति, सुख और संतुष्टि प्राप्त करने में मदद मिले। उन्होंने बताया कि यह एक गहरा आध्यात्मिक अनुभव है जो हमें अपने आप को दूसरों से जुडऩे में और एकता की भावना महसूस करने में मदद करता है। इस प्रक्रिया में, हम अपने आप को एक बड़े और व्यापक परिपे्रक्ष्य में देखते हैं और हमारे विचार और भावनाएं अधिक सकारात्मक और उदार हो सकती हैं। उन्होंने बताया कि हमें भी भगवान श्रीकृष्ण की तरह जीवन में लेने की अपेक्षा देने वाला बनना चाहिए।
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आधुनिकता बन रही तनाव की कारण: बीके सूर्या
इस अवसर पर राजयोगी बीके सूर्या ने कहा कि आधुनिक जीवन की गति तनाव ग्रसित है। हमारी बुद्धि का विकास तो हुआ लेकिन मन की स्थिति कमजोर हो गई। इसलिए हमें वर्तमान जीवन की जटिलताओं और तनाव से बचना चाहिए और एक सरल व संतुष्ट जीवन जीने की ओर बढऩा चाहिए। इसके लिए हमें अपने जीवन में कुछ बदलाव करने चाहिए। हमें प्रकृति के करीब रहना, सरल जीवन जीने, मन को शांत रखना और संतुष्ट रहने के भाव विकसित करने चाहिएं। वर्तमान की शिक्षा प्रणाली जानकारी देने पर आधारित है, यह हमें ज्ञान नहीं देती, इसलिए जरूरी है कि हमें वर्तमान शिक्षा प्रणाली के अलावा आध्यात्मिक संस्कार लेने का प्रयास करना चाहिए क्योंकि ज्ञान और जानकारी में गंभीर अंतर है। सच्चा ज्ञान वही है जो हमें गुणों को धारण करने व सच्चा मनुष्य बनने में मदद करता है। आध्यात्मिक ज्ञान से हम क्रोध मुक्त, सतुष्ट, नम्र, एक दूसरे को सुख देने वाले बनेंगे। उन्होंने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की सभी को बधाई दी। इस अवसर पर प्रस्तुति देने वाले बच्चों को उपहार देकर उनका हौसला बढ़ाया गया।

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