सिरसा । श्री विष्णु क्लब में चल रही भव्य रामलीला में दर्शक इन दिनों भक्ति और करुणा के गहन भावों में डूबे हुए हैं। पिछले मंचन में कथा ने एक अत्यंत मार्मिक और महत्वपूर्ण मोड़ लिया, जिसमें माता सीता के हरण से लेकर हनुमान जी से राम के मिलाप तक के प्रसंगों का सजीव मंचन किया गया। प्रधान दीपक सेठी ने बताया कि डॉक्टर मनदीप गर्ग, एक्सईन विजय गोयल, ईओ सुनील रंगा विशेष रूप से पहुंचे और रामलीला की प्रशंसा की। मंचन में दिखाया गया कि कैसे राक्षस मारीच ने रावण के कहने पर स्वर्ण मृग का रूप धारण किया और पंचवटी में आकर विचरण करने लगा। माता सीता उस अद्भुत मृग को देखकर मोहित हो गईं और उन्होंने भगवान राम से उसे लाने का आग्रह किया।
अपनी प्रियतमा की इच्छा पूरी करने के लिए राम मृग के पीछे वन में चले गए। कुछ समय बाद, मृग रूपी मारीच ने राम की आवाज़ में ‘हा सीते, हा लक्ष्मण’ कहकर करुण पुकार लगाई। इस पुकार को सुनकर माता सीता अत्यंत व्याकुल हो गईं और उन्होंने लक्ष्मण को तुरंत राम की सहायता के लिए जाने को कहा। तमाम समझाने के बावजूद, सीता जी के कठोर वचनों से आहत होकर लक्ष्मण ने अपनी भाभी की रक्षा के लिए कुटी के चारों ओर एक सुरक्षा रेखा खींची— जिसे इतिहास में ‘लक्ष्मण रेखा’ के नाम से जाना जाता है— और वे भारी मन से राम की खोज में निकल गए। जैसे ही कुटिया सूनी हुई, लंकापति रावण ने एक तपस्वी, साधु का वेश धारण किया और भिक्षा मांगने के बहाने कुटी के द्वार पर आया। सीता जी ने साधु का आदर करते हुए उन्हें भिक्षा देने के लिए लक्ष्मण रेखा के भीतर से हाथ बढ़ाया। परंतु, रावण ने भिक्षा लेने से इनकार कर दिया और सीता जी को रेखा पार करके बाहर आने का छल भरा आग्रह किया। जैसे ही सीता जी ने लक्ष्मण रेखा का उल्लंघन किया, रावण अपने असली रूप में आ गया। उसने बलपूर्वक माता सीता का हरण किया और उन्हें अपने रथ में बिठाकर आकाश मार्ग से लंका की ओर चला गया। रास्ते में जटायु से रावण का युद्ध और सीता जी का विलाप मंच पर अत्यंत हृदय विदारक था।
यह दृश्य राम कथा का सबसे बड़ा आघात था, जिसने पूरी सभा को स्तब्ध कर दिया और दर्शकों की आँखें नम हो गईं। सीता जी के आश्रम में न मिलने पर भगवान राम का विलाप कलाकारों ने अत्यंत भावुकता के साथ प्रस्तुत किया। अपनी प्रियतमा के वियोग में राम का दर्द, प्रकृति से उनकी खोज, और करुणा से भरी उनकी पुकार ने मंच पर एक ऐसा माहौल बनाया कि दर्शक भी इस दुख को महसूस करने लगे। कलाकारों के उत्कृष्ट अभिनय ने राम के इस मानवीय दर्द को पराकाष्ठा पर पहुँचा दिया। दुःख की इस घड़ी के बाद, कथा ने आशा की ओर रुख किया। मंच पर श्री हनुमान जी का आगमन हुआ और उनका भगवान राम से मिलाप हुआ। यह दृश्य राम कथा का वह निर्णायक मोड़ है जहाँ राम को उनकी शक्ति, भक्ति और सहयोग का आधार प्राप्त होता है। हनुमान जी के आत्मविश्वास से भरे संवाद और राम-हनुमान के मिलन ने दर्शकों में एक नई ऊर्जा और उत्साह का संचार कर दिया। अजय डोडा ने श्री राम, पूनम डोडा ने सीता, साहिल शर्मा ने लक्ष्मण, आकाश साहनी ने रावण, विकास सेठी ने मारीच, विकास सुखीजा ने बाबा रावण, साकु ने हिरण, लोकेश सलूजा ने जटायु, मनीषर् शर्मा ने शबरी, नरेंद्र चोपड़ा ने हनुमान, जतिन नागपाल ने सुग्रीव, लविश खुराना ने सेना का किरदार अदा किया। मंचन देखने पहुंचे अतिथियों को श्री विष्णु क्लब ने स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। क्लब के आयोजकों ने बताया कि यह प्रसंग रामलीला का सबसे भावनात्मक और महत्वपूर्ण हिस्सा था, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में दर्शक उपस्थित हुए।

