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नहरों में 2 हफ्ते सप्लाई व एक हफ्ते बंदी का शैड्यूल लागू किया जाए: लखविंदर सिंह औलख

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-अपनी मांगों को लेकर नहरी विभाग में जाकर किसानों ने किया प्रदर्शन
-किसानों को खरीफ  सीजन के लिए डीएपी व यूरिया खाद की उपलब्धता बिना किसी टैगिंग के सुनिश्चित करवाई जाए: औलख
-अहमदाबाद विमान हादसे में मारे गए लोगों को दो मिनट का मौन रखकर दी श्रद्धांजली
-राजस्थान के कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा की तर्ज पर हरियाणा में भी नकली, निम्न सत्र के बीज, पेस्टिसाइड, फर्टिलाइजर व बायोफर्टिलाइजर बनाने वाली फैक्ट्री पर की जाए करवाई: औलख
-कृषि विभाग में चंडीगढ़ से लेकर जिला मुख्यालयों व सरकारी लैबोरेट्रीयों के अधिकारियों/कर्मचारियों द्वारा हो रहे भ्रष्टाचार पर लगाया जाए अंकुश: औलख
-कृषि विभाग में बढ़ रहे भ्रष्टाचार को रोकने के लिए सभी अधिकारियों के ग्रंथ किए जाएं तबादले: औलख
सिरसा। भारतीय किसान एकता बीकेई की प्रदेशाध्यक्ष लखविंदर सिंह औलख की अध्यक्षता में जाट धर्मशाला सिरसा में मीटिंग हुई, जिसमें सिरसा व फतेहाबाद जिला के किसानों ने आ रही दिक्कतों के बारे में जानकारी दी। सर्वप्रथम अहमदाबाद विमान हादसे में मारे गए लोगों को दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजली दी गई। औलख ने कहा कि कई महीनों से किसान व आमजन पीने व सिंचाई के पानी की कमी से जूझ रहे हैं। हर साल 21 मई से नहरों की सप्लाई के शैड्यूल बदले जाते हैं, जो अभी तक नहीं बदल गया है नहरों में पानी की कमी से हजारों किसानों की नरमे व ग्वार की बिजाई नहीं हो पाई है। नहरी विभाग तुरंत प्रभाव से दो सप्ताह सप्लाई व एक सप्ताह बंदी वाला शैड्यूल जारी करें, जिससे कि किसान अपनी फसलों को पाल सकेंव पीने की पानी की किल्लत दूर हो सके। ओटू हैड पर हिसार-घग्गर ड्रेन पर बने साइफन की रिपेयर जल्द की जाए, ताकि शेरांवाली पैरेलल, एसजीसी नहर व कुत्ताबढ़ माइनर में पानी की सप्लाई दी जा सके। ओटू हैड पर रिपेयर के नाम पर लंबे समय से हो रहे भ्रष्टाचार की स्वतंत्र जांच एजेंसी से जांच करवाकर इसमें शामिल अधिकारियों के पर विभागीय कार्रवाई करवाई जाए। एनजीसी नहर पर बनने वाले साइफन का निर्माण करवाया जाए। बायोफर्टिलाइजर के नाम पर किसानों से हो रही लूट व धोखाधड़ी को बंद करवाया जाए, डीएपी व यूरिया खाद की उपलब्धता बिना किसी टैगिंग के सुनिश्चित की जाए। इफको सेंट्रो सहकारी, सरकारी व प्राइवेट दुकानों पर फर्टिलाइजऱ के साथ की जाने वाली टैगिंग पूर्ण रूप से बन्द की जाए। राजस्थान के कृषि मंत्री करोड़ी लाल मीणा की तर्ज पर हरियाणा में भी गंद-बंद अभियान चलाया जाए। किसानों को लूटने वाली व जीएसटी की चोरी करके सरकार को चूना लगाने वाली सभी बायोफर्टिलाइजर, फर्टिलाइजर व पेस्टिसाइड कंपनियां पर कार्रवाई की जाए। हरियाणा में कृषि विभाग में भ्रष्टाचार का बोलबाला है, निम्न क्वालिटी, बिना अनुमति वाले, लंबे समय से अनुबंधित उत्पाद, रंग-बिरंगी थैलियां व गट्टों में बायो फर्टिलाइजऱ के नाम मिट्टी व दाना भरकर बेचने वाली कंपनियों के साथ कृषि विभाग के कई उच्च अधिकारियों व उप कृषि निर्देशों के गुप्त रूप से हिस्से भी डाल रखे हैं और अन्य कंपनियों से माल बेचने के नाम पर मोटी उग्राही की जाती है। निम्न क्वालिटी के उत्पाद बेचने वाली कंपनियों ने कृषि विभाग की साठगांठ से गांवों, कस्बों, तहसीलों व जिला मुख्यालयों तक अपना जाल बिछा रखा है इन कंपनियों पर कृषि विभाग मेहरबान रहता है किसी तरह के जांच के लिए नमूने भी नहीं लिए जाते हैं। अगर किसानों की शिकायत पर कोई सैंपल भरना भी पड़े तो उसे रास्ते में ही बदल दिया जाता है। कृषि विभाग की लेबोरेटरी में भी खुलेआम भ्रष्टाचार है, वहां पर भी मोटी रकम देकर सैंपल पास करवा लिए जाते हैं हिसार की लेबोरेटरी में ऐसा लंबे समय से खेल चल रहा है। आरटीआई से एक रिपोर्ट ली थी, जिसमें हैरानी जनक आंकड़े पता चले हैं, जितने भी पेस्टिसाइड फर्टिलाइजर के सैंपल हुए हैं, वह नामी व अच्छा काम करने वाली कंपनियों के लिए गए हैं, निम्न क्वालिटी वाले व विभाग से मिलीभुक्त वाली कंपनियों के सैंपल नहीं भरे जा रहे हैं ना ही उनकी चेकिंग की जा रही है। डीएसआर की बकाया राशि जारी की जाए, खेतों में बनी हुई पानी की डिग्गियों की बकाया राशि जारी की जाए, खरीफ -2022 का 1132 आवेदन कर्ताओं का बकाया बीमा क्लेम जारी किया जाए, सिरसा जिले के पुलिस विभाग द्वारा चालान अभियान चला रखा है, जो गांवों में घरों तक पहुंच कर चालान किए जा रहे हैं 112 नंबर गाड़ी को भी चालान में लगाया गया है। कभी किसी को उसकी जरूरत पड़े तो आधा घंटे से घंटे तक वह गाड़ी नहीं पहुंच पा रही है। पुलिस ने अपराधियों व नशाखोरों से ध्यान हटाकर आमजन से कलेक्शन करने पर जोर दे रखा है। पुलिस अधीक्षक से हम अपील करते हैं कि जो आपने सारा अमला चालान काटने पर लगा रखा है, उसे लोगों के पेंडिंग पड़े कामों पर भी लगाएं, ताकि आमजन को पुलिस चौकियों या थानों के चक्कर न लगाने पड़ें।

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