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बाबा बंदा सिंह बहादुर म्यूजियम के भूमि पूजन कार्यक्रम में सिख मर्यादा की अनदेखी, संगत में भारी रोष

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हरियाणा सिख एकता दल ने की सरकार से माफी और स्पष्टीकरण की मांग: लखविंदर सिंह औलख
सिरसा। सिख कौम के महान जरनैल, पहले खालसा राज के संस्थापक और अमर शहीद बाबा बंदा सिंह बहादुर जी ने गुरु गोबिंद सिंह जी से अमृत छक कर, उनके बताए मार्ग पर चलते हुए उत्तर भारत से मुग़ल सल्तनत की जड़ों को उखाड़ फेंका था। उनकी शौर्यगाथा सिख इतिहास की अमर विरासत है। इसी महान वीर की स्मृति में हरियाणा सरकार द्वारा यमुनानगर के लोहगढ़ में बनाए जा रहे बाबा बंदा सिंह बहादुर म्यूजियम के भूमि पूजन कार्यक्रम में सिख रीति-रिवाजों को दरकिनार कर हिंदू धार्मिक परंपरा अनुसार भूमि पूजन किए जाने पर प्रदेश व देशभर की सिख संगत में गहरा रोष व्याप्त है। हरियाणा सिख एकता दल ने इस घटना को सिख मर्यादा का घोर उल्लंघन बताया है और इस मुद्दे पर विचार हेतु 3 नवंबर को लोहगढ़ स्थित स्मारक स्थल पर प्रदेशभर के जागरूक सिखों, बुद्धिजीवियों और विद्वानों की विशेष बैठक बुलाने का निर्णय लिया है। हरियाणा सिख एकता दल से लखविंद्र सिंह औलख ने कहा कि हम सनातन धर्म की परंपराओं का सम्मान करते हैं, लेकिन सिख धर्म की अपनी विशिष्ट मर्यादा है। सिख गुरुओं अथवा सिख शहीदों से जुड़े स्थलों की नींव सदैव गुरुबाणी पाठ, कीर्तन या अरदास के साथ रखी जाती है। जब किसी स्थल का नाम अमर शहीद बाबा बंदा सिंह बहादुर जी के नाम से जोड़ा गया है तो वहां कार्यक्रम सिख मर्यादा के अनुसार ही होना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भले ही यह परियोजना सरकार द्वारा स्थापित ट्रस्ट के अंतर्गत चलाई जा रही हो, लेकिन इससे जुड़ा हर कार्य सिख धार्मिक मर्यादा और ऐतिहासिक भावना के अनुरूप होना आवश्यक है। हरियाणा सिख एकता दल ने सरकार से इस घटना के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगने, म्यूजियम की पूरी रूपरेखा, विषयवस्तु और प्रदर्शनी का प्रारूप सिख संगत के समक्ष प्रस्तुत करने, निर्माण कार्य शुरू करने से पहले शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी, हरियाणा सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी  तथा सिख विद्वानों से परामर्श करने, म्यूजियम से संबंधित सामग्री में सिख इतिहास के किसी भी तथ्य से छेड़छाड़ न हो, इसकी गारंटी देने संबंधी मांगें रखी। दल ने बाबा बंदा सिंह बहादुर ट्रस्ट के सदस्य सचिव डा. प्रभलीन सिंह और भाजपा से जुड़े सिख नेताओं से भी अपनी भूमिका स्पष्ट करने की अपील की है कि क्या वे सिख मर्यादा की रक्षा में खड़े होंगे या राजनैतिक दबाव में मर्यादा उल्लंघन को नजरअंदाज करेंगे। उल्लेखनीय है कि केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर के मुख्यमंत्री रहते हुए भी बाबा बंदा सिंह बहादुर जी का नाम बंदा वैरागी लिखने पर बड़ा विवाद खड़ा हुआ था, जिसे संगत के विरोध के बाद सुधारा गया था। अब भूमि पूजन में गैर-सिख परंपरा अपनाने से संगत की भावनाएं फिर आहत हुई हैं। हरियाणा सिख एकता दल ने श्री अकाल तख्त साहिब, एसजीपीसी, एचएसजीएमसी और सभी सिख जत्थेबंदियों से अपील की है कि वे इस मामले में सरकार के प्रति कड़ा विरोध दर्ज करें और तुरंत इस घटना का संज्ञान लें। हरियाणा सिख एकता दल ने सरकार को चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने माफी मांगने और मर्यादा बहाली के ठोस कदम नहीं उठाए तो हरियाणा की सिख संगत बड़े संघर्ष के लिए तैयार है। अंत में दल ने कहा कि अगर एसजीपीसी या एचएसजीएमसी के चुने हुए या नामांकित सदस्य भी इस मुद्दे पर संगत की भावनाओं का प्रतिनिधित्व नहीं करते, तो उन्हें भी सिख क़ौम के प्रति जवाबदेह होना पड़ेगा।

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