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पंजाब हरियाणा के सीमावर्ती गांव के युवाओं को नशे से दूर रखने को एचएमईएल की पहल, 29 गांव में खुलवाए जिम

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-अब 500 से ज्यादा युवा सेहत के लिए जिम में बहाते है पसीना, बंगी रूघु व बंगी दीपा कम्युनिटी कंटरीब्यूशन की बना मिसाल, युवाओं ने निजी बचत से लाखों रूपये जुटाकर बनवाए कमरे, रिफाइनरी ने मुहैया करवाए जिम

 

बठिंडा: सीमावर्ती गांव को नशे की दलदल से निकलाने व युवाओं को एक नई दिशा देने के लिए एचएमईएल की तरफ से शुरू किए गए प्रयास अब रंग लाने लगे हैं। युवाओं की सेहत को मुख्य रखकर पंजाब हरियाणा के करीब 29 सीमावर्ती गांव में खोले गए जिम अब युवाओं को नशे से दूर कर सेहत की तरफ कदम बढाने के लिए आकर्षित कर रहे हैं, जिससे गुरू गोबिंद सिंह रिफाइनरी के आसपास के गांव के करीब 500 से ज्यादा युवा अब सेहत के लिए जिम में पसीना बहाते देखे जा सकते हैं। यह प्रयास इन गांव की ग्राम पंचायतों व युवाओं के सहयोग से एचएमईएल की तरफ से खोले गए अत्याधुनिक जिम से संभव हो पाया है। यह प्रयास न केवल सेहत बल्कि कम्युनिटी कंटरीब्यूशन व आपसी भाईचारे को बढावा देकर गांव से नशे के प्रभाव को खत्म करने में भी कारगर साबित हो रहा है। खास बात यह है कि अब इसमें वह युवा जो पुलिस व सेना में जाने के लिए अपने आपको तैयार कर रहे हैं उन्हें भी इससे जुडकर फायदा हो रहा है।

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कम्युनिटी कंटरीब्यूशन की मिसाल बने कई गांव, युवाओं ने निजी बचत से तैयार कवराए कमरे, एचएमईएल ने दिए जिम

गांव के युवाओं को नशे से दूर कर सेहत की तरफ आकर्षित करने की इस पहल ने यहां एक नई दिशा दी है, वहीं कम्युनिटी कंटरीब्यूशन को भी बढावा दिया है। कई गांव तो इसकी सफल उदाहरण बनकर उभरे हैं। इन्हीं में से एक गांव है बंगी रूघु यहां के युवा नेतृत्व की अनोखी पहल इन दिनों चर्चा का केंद्र बनी हुई है। बंगी रूघु गांव के युवाओं ने कम्युनिटी कंटरीब्यूशन के जरिए व्यक्तिगत बचत से करीब 4 लाख रूपये जुटाकर गांव में एक जिम रूम का नवीनीकरण करवाया। गांव के युवा हरदीप सिंह ने बताया कि युवाओं ने स्वयं 46 दिन लेवर कर इस जिमखाने के लिए कमरे को तैयार किया। इस परियोजना के लिए काफी प्रयास और संसाधनों की आवश्यकता थी। युवाओं ने सामूहिक योगदान के माध्यम से अपनी प्रतिबद्धता और टीम भावना स्पष्ट की। इसके बाद एचएमईएल ने उन्हें एक अत्याधुनिक जिम का सामान मुहैया करवाया। अब गांव के युवा यहां रेगुलर जिम करते हैं, जिनमें से कई तो सेना व पुलिस के लिए स्वयं को तैयार कर रहे हैं।

 

गांव बंगी दीपा के सरपंच पति गोपाल सिंह बताते हैं कि उनके गांव में पहले कुछ युवा नशे की लत में लग पडे थे, मगर पंचायत ने गांव वासियों व गांव के कुछ एनआरआई की मदद से गांव में ही जिम खोलने का निर्णय लिया। इसके लिए एचएमईएल रिफाइनरी प्रबंधन ने मदद की। उन्होंने बताया कि ग्रामीणों, पंचायत व एनआरआई की मदद से करीब 14 लाख रूपये जुटाकर गांव में जिम की इमारत का निर्माण करवाया गया। इसके बाद एचएमईएल ने यहां अत्धुनिक जिम प्रदान किया। अब उनके गांव के जो युवा नशे की तरफ चले गए थे वह भी लौटने लगे हैं व जिम मंे जाकर अपनी सेहत बनाने लगे हैं। उन्हांेने बताया कि गांव के 10 से 12 युवा तो सेना व पुलिस में जाने के लिए तैयारी कर रहे हैं जिन्हें जिम से लाभ हो रहा है।

 

इसी तरह गांव मलकाना मे तो गांव के कई सैनिक युवा भी इस प्रयास से जुड गए हैं व इसे निरंतर जारी करने के लिए मदद कर रहे हैं। ग्रामीण युवाओं की सेहत के लिए किए गए इस संयुक्त प्रयास से कम्युनिटी कंटरीब्यूशन के साथ एक भाईचारे का माहौल भी डेवल्प हो रहा है, जिससे गांव के युवाओं को एक नई दिशा मिली है।

 

हरियाणा सीमा से सटे गांव तिगडी में यहां की ग्राम पंचायत ने पंचायत भवन में जिम के लिए जगह मुहैया करवाई। गांव के सरपंच पुष्पिंद्र सिंह ने बताया कि एचएमईएल के जिम खुलने के गांव युवाओं में एक सकारात्मक माहौल दिखने लगा है। इससे युवा अपना खाली समय व्यर्थ गवाने की बजाए उसे अपनी सेहत में लगा रहे हैं।

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सीमावर्ती गांव में जिम खुलने से नशे के प्रभाव को भी खत्म करने में मिल रही मदद

एचएमईएल ने गुरू गोबिंद सिंह रिफाइनरी के आसपास स्थित पंजाब व हरियाणा के सीमावर्ती गांव में स्वस्थ्य जीवनशैली को बढावा देने के लिए जिम खोलने की पहल कुछ महीने पहले शुरू की थी। अब तक गांव तिगडी, हस्सू, मलकाना, तरखानवाला, रामसरा, देसु मलकाना, चट्ठा, खोखर, असीर, नौरंग, पक्का खुर्द, लहरी, नथेहा, बंगी निहाल सिंह, बहमन जस्सा ंिसंह, चक्क रूलदू सिंह, सुखलद्दी, कलालवाला, बंगी रूघु, बंगी दीपा, बंगी कलां समेत करीब 29 गांव में जिम खोले जा चुके हैं। इससे पहले इन गंाव के युवा रामां या कालांवाली जिम के लिए जाते थे, जिससे उन्हें कई किलोमीटर दूरी तय करनी पडती थी। मगर अब उनके गांव में ही उन्हें अत्याधुनिक जिम खोलकर दिए गए हैं। इन जिम का संचालन गांव के यूथ क्लबों की तरफ स ग्राम पंचायतों के सहयोग से किया जा रहा है। इससे गांव में नशे की प्रवृति को कम करने में भी मदद मिल रही है।

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