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संकटमोचन हनुमान जी का चरित्र युवाओं हेतु राष्ट्र के प्रति सच्ची कत्र्तव्यनिष्ठा, साहस व सेवा के रूप में अनुकरणीय है: स्वामी विज्ञानानंद

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सिरसा। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा स्थानीय पुलिस लाइन मंदिर में तीन दिवसीय सुंदर काण्ड कथा के  तृतीय दिवस संस्थान की ओर से दिव्य गुरु आशुतोष महाराज के शिष्य कथा व्यास स्वामी विज्ञानानंद ने सुंदरकांड प्रसंग को बहुत रोचक ढंग से प्रस्तुत करने के साथ-साथ उसमें निहित आध्यात्मिक रहस्यों को भी उजागर किया। उन्होंने कहा भक्त हनुमान जी की सीता जी तक पहुंचने की यात्रा वास्तव में भक्त की भक्ति को प्राप्त करने की यात्रा है। जिस प्रकार इस यात्रा में हनुमान जी के सामने विभिन्न प्रकार की परिस्थितियां आई। किन्तु वह हर परिस्थितियों का सामना करते हुए अपने लक्ष्य को प्राप्त करते है। ठीक ऐसी भावना हमारी भी होनी चाहिए। आज विशेष रूप से स्वामी जी ने अपने विचारों में आज के युवा वर्ग को पवनपुत्र हनुमान जी के चरित्र से प्रेरणा लेते हुए कहा कि हनुमान जी का चरित्र युवाओं हेतु राष्ट्र के प्रति सच्ची निष्ठा, साहस व सेवा के रूप में अनुकरणीय है। हनुमान जी का चरित्र युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। हनुमान जी की भगवान राम के प्रति निष्ठा और समर्पण युवाओं को अपने लक्ष्यों और आदर्शों के प्रति समर्पित रहने की प्रेरणा देता है। हनुमान जी के साहसिक कार्यों से युवाओं को अपने डर पर विजय पाने और आत्मविश्वास बढ़ाने की प्रेरणा मिलती है। हनुमान जी की सेवा और परोपकार की भावना युवाओं को समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझने और उनका पालन करने के लिए प्रेरित करती है। हनुमान जी के चरित्र में धैर्य और संयम का अद्भुत उदाहरण है, जो युवाओं को जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार करता है। अत: हनुमान जी का चरित्र युवाओं को एक आदर्श जीवन जीने के लिए प्रेरित करता है, जिसमें निष्ठा, साहस, सेवा और धैर्य जैसे गुणों का समावेश हो। युवा वर्ग को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जाग्रत करते हुए स्वामी जी ने कहा कि जिसमें तनिक भी शांति नहीं, वही नशा है। चूंकि युवा हमारे देश की रीढ़ की हड्डी है। जैसे हमारा शरीर रीढ़ बिना खड़ा नहीं हो सकता, ठीक उसी प्रकार युवाओं का भी समाज के उत्थान में विशेष योगदान होता है। इनके बिना प्रगति संभव नहीं है। किन्तु अफसोस की बात हमारे युवा अपनी ऊर्जा अपनी शक्ति को भूल चुके हैं और पतन की राहों पर अग्रसर हो रहे हैं, जिससे ना केवल स्वयं के जीवन को नष्ट कर रहे हैं, अपितु समाज को भी विनाश की गर्त में ले जा रहे है। भारत युवा प्रधान देश है अगर युवा स्वयं को जान ले तो हमारे समाज का उत्कर्ष संभव है। आज ज़रूरत है युवाओं को अध्यात्म ज्ञान से जुडऩे की। अध्यात्म ज्ञान हमारी जड़ है। इससे जुड़े बिना हमारा जीवन खुशहाल नहीं हो सकता। किन्तु यह ब्रह्मज्ञान केवल मात्र पूर्ण गुरु ही हमें प्रदान कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त कथा में सुमधुर भजनों व चौपाइयों का गायन भी किया गया। कथा का समापन प्रभु की मंगल आरती से किया गया।

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