सिरसा। स्वर्णकार समाज की ओर से सोनी धर्मशाला में 31 मई से 7 जून तक आयोजित की जा रही संगीतमयी श्रीमद्भागवत कथा के 7वें दिन कथावाचिका डा. राधिका दीदी ने सुदामा चरित्र का मार्मिक वर्णन किया। उन्होंने बताया कि यह कथा हमें सिखाती है कि सच्ची मित्रता में अमीर-गरीब का कोई भेद नहीं होना चाहिए। श्री कृष्ण और सुदामा ने संदीपनि ऋषि के आश्रम में साथ शिक्षा ग्रहण की थी। बाद में, कृष्ण द्वारका के राजा बन गए, जबकि सुदामा अत्यंत गरीब हो गए और एक साधारण ब्राह्मण के रूप में अपना जीवन व्यतीत करने लगे। सुदामा की पत्नी के आग्रह पर, सुदामा अपने गरीब परिवार की मदद की उम्मीद में खाली हाथ कृष्ण से मिलने द्वारका पहुंचे। सुदामा के फटेहाल कपड़ों को देखकर द्वारपाल हैरान रह गया और कृष्ण को सूचना दी। सुदामा की दयनीय दशा सुनकर श्री कृष्ण नंगे पैर दौड़ते हुए महल के द्वार तक आए। कृष्ण अपने मित्र को देखकर रो पड़े और अपने आंसुओं से ही सुदामा के पैर धो दिए। सुदामा शर्म के मारे कृष्ण को अपनी पोटली नहीं दे पाए, जिसमें वे थोड़े से चावल लाए थे। कृष्ण ने खुद उनकी कांख से वह पोटली निकाल ली और प्रेम से चावल खाए। जब सुदामा द्वारका से अपने घर लौटे, तो उन्हें अपनी कुटिया के स्थान पर एक भव्य महल मिला। कृष्ण ने बिना कुछ कहे ही अपने मित्र के सभी कष्ट दूर कर दिए थे, जिससे उनकी मित्रता हमेशा के लिए अमर हो गई। प्रसाद वितरण के साथ ही 7वें दिन की कथा को विश्राम दिया गया। इस मौके पर सोनी धर्मशाला के प्रधान सोनू गोरीवाला, तहसील प्रधान गजानंद सोनी सिरसा, लीलाधर सोनी, संजय सोनी, महेंद्र सोनी, राजकुमार सोनी, कृष्ण सोनी, सुरजीत सोनी, बंसीलाल सोनी, सतपाल सोनी, प्रमोद सोनी, रामप्रताप सोनी, मदन सोनी, विकास सोनी, बलवंत सोनी, राजू सोनी, रामकिशन सोनी, मनोज सोनी, काशीराम सोनी, सुखविंद्र सोनी सहित स्वर्णकार समाज के अनेक महानुभाव उपस्थित थे।
सच्ची मित्रता में अमीरी-गरीबी का भेद नहीं होना चाहिए: डा. राधिका दीदी
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