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सावन मास की अमावस्या पर प्राचीन श्री शनि धाम में शनि जन्मोत्सव  समारोह 12 अगस्त को

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सावन के महीने में भगवान शिव के साथ शनि देव जी की पूजा का भी है विशेष महत्व
सिरसा। सावन का महीना भगवान शिव की पूजा के लिए विशेष माना जाता है। श्रद्धालु पूरे महीने भर भगवान शिव को धूप दीप नैवेद्य अर्पित कर प्रसन्न करते हैं और मनोवांछित फल पाते हैं। सावन के महीने में भगवान शिव के साथ-साथ उनके प्रिय शिष्य धरती की न्यायाधीश भगवान शनि देव जी की पूजा का भी विशेष महत्व है, क्योंकि सावन के महीने में ही भगवान शनि देव जी का जन्मोत्सव मनाया जाता है। सावन मास की हरियाली अमावस्या को शनि देव जी का जन्मोत्सव मनाया जाता है।  इस बार सावन मास की हरियाली अमावस्या 12 अगस्त की है। इस पावन अवसर पर नोहरिया बाजार स्थित प्राचीन श्री शनि धाम में भव्य शनि जन्मोत्सव समारोह का आयोजन किया जाएगा। यह जानकारी देते हुए मंदिर पुजारी योगेश भार्गव ने बताया कि इस बार शिवरात्रि व सावन मास की अमावस्या साथ साथ है। 11 अगस्त को शिवरात्रि है, जबकि 12 अगस्त को सावन मास की अमावस्या है। भगवान शिव शनिदेव जी के गुरु हैं और उन्होंने ही शनि देव को धरती का न्यायाधीश नियुक्त किया है, वे जीवों को उनके अच्छे बुरे कर्मों के अनुसार शुभ-अशुभ फल प्रदान करते हैं। मंदिर पुजारी ने बताया कि शनि जन्मोत्सव समारोह से एक दिन पूर्व मंदिर में शिवरात्रि महोत्सव मनाया जाएगा तथा अगले दिन शनि जयंती समारोह मनाया जाएगा, जिसमें शनि देव जी की विशेष पूजा अर्चना की जाएगी और उन्हें तेल से स्नान करवाया जाएगा। तत्पश्चात मंदिर में प्रसाद का वितरण किया जाएगा।
सिरसा में भव्य और दिव्य है शनि धाम:
नोहरिया बाजार स्थित प्राचीन श्री शनि धाम करीब 225 वर्ष पुराना है। वर्तमान में जीर्णोद्धार के बाद इसे बहुत ही भव्य और दिव्य रूप प्रदान किया गया है। मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यहां स्थापित भगवान शनि देव जी की हाथी पर सवार प्रतिमा है, जो सैकड़ों वर्ष पुरानी है। पश्चिम मुखी है प्रतिमा अभयदान देने वाली है और मनोवांछित फल देती है। मंदिर में भगवान शनि देव जी की शिला के अलावा शनि जी के नौ वाहनों पर स्वरूप तथा नवग्रह दरबार भी विशेष आकर्षण का केंद्र है। मंदिर में स्थापित शिवालय में नर्मदेश्वर महादेव स्थापित हैं जो अत्यंत कल्याणकारी हैं सावन के पूरे महीने में यहां श्रद्धालु बाबा को दूध, जल, गंगाजल बेलपत्र, पुष्प आदि अर्पित करते हैं। संपूर्ण मंदिर परिसर सफेद रंग के पत्थर से बना हुआ है, जो सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करने वाला है और मन को अति शांति देने वाला है।

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