सिरसा। Gen-Z को लेकर वर्तमान में खूब चर्चा है। कोई उन्हें अनुशासनहीन कहता है, तो कोई भविष्य की सबसे सक्षम पीढ़ी, लेकिन किसी भी पीढ़ी का मूल्यांकन केवल उसकी कमियों से नहीं किया जा सकता। ज्योतिष व वास्तु शास्त्र विशेषज्ञ डॉ. पुनीत गोयल ने बताया कि सच्चाई यह है कि हर युग में पुरानी पीढ़ी ने नई पीढ़ी को लेकर यही शिकायत की है। फर्क सिर्फ इतना है कि आज बदलाव की गति पहले से कहीं अधिक तेज है। इंटरनेट, सोशल मीडिया और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) ने सोचने, सीखने और जीने का तरीका बदल दिया है। Gen-Z प्रश्न पूछती है, तर्क करती है और अपनी पहचान स्वयं बनाना चाहती है। यह उसकी ताकत भी है और चुनौती भी। वहीं लगातार डिजिटल दुनिया में रहने के कारण धैर्य, एकाग्रता, मानसिक संतुलन और रिश्तों की गहराई जैसी चुनौतियां भी सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि मेरा मानना है कि समाधान केवल आलोचना में नहीं, संवाद में है। माता-पिता और शिक्षकों को केवल आदेश देने वाले अभिभावक नहीं, बल्कि अच्छे श्रोता और मित्र भी बनना होगा। हर बात का उत्तर क्योंकि, मैंने कहा है नहीं, बल्कि तर्क, उदाहरण और विश्वास के साथ देना होगा। बदलते समय के साथ स्वयं को भी अपडेट करना उतना ही आवश्यक है जितना बच्चों से अपेक्षाएं रखना। डा. गोयल ने कहा कि वहीं नई पीढ़ी को भी यह समझना होगा कि अनुभव का कोई विकल्प नहीं होता। स्वतंत्रता का वास्तविक अर्थ जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ना है। भारतीय ज्ञान परंपरा हमें मन के संतुलन का मार्ग दिखाती है। चाहे उसे ध्यान कहें, स्वाध्याय कहें या आत्मचिंतन—दिन के कुछ शांत क्षण व्यक्ति को स्वयं से जोड़ते हैं। ज्योतिष भी यही संकेत देता है कि जब मन असंतुलित होता है, तब निर्णय भी असंतुलित होने लगते हैं। इसलिए ग्रहों से पहले अपने विचारों और व्यवहार को संतुलित करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आने वाले भारत का निर्माण केवल Gen-Z नहीं करेगी, बल्कि वह संवाद करेगा जो पुरानी और नई पीढ़ी के बीच स्थापित होगा। जब अनुभव और नवाचार साथ चलेंगे, तभी एक मजबूत, संवेदनशील और प्रगतिशील समाज का निर्माण होगा।
Gen-Z समस्या नहीं, परिवर्तन का संकेत: डा. पुनीत गोयल
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