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आज राजकीय मॉडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, बप्पा के प्रांगण में राष्ट्रीय ध्वज दिवस बड़े ही हर्षोल्लास एवं उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर विद्यालय में विद्यार्थियों को पौधे वितरित किए गए तथा उन्हें “एक पौधा माँ के नाम और एक पौधा राष्ट्र के नाम” लगाने का संकल्प दिलाया गया। इस अभिनव पहल के माध्यम से छात्रों में राष्ट्रध्वज के प्रति सम्मान और पर्यावरण संरक्षण की भावना को जागृत किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य संयोजक राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई के कार्यक्रम अधिकारी श्री नरेश कुमार ग्रोवर ने इस अवसर पर विद्यार्थियों को राष्ट्रीय ध्वज का इतिहास, उसकी संरचना और महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि भारत का वर्तमान तिरंगा ध्वज पहली बार 22 जुलाई 1947 को भारतीय संविधान सभा द्वारा अपनाया गया था और इसे 15 अगस्त 1947 को पहली बार आधिकारिक रूप से फहराया गया। उन्होंने बताया कि हमारे ध्वज में तीन रंग हैं:
गहरा केसरी (ऊपरी पट्टी): यह साहस और बलिदान का प्रतीक है।
सफेद (मध्य पट्टी): यह शांति, सच्चाई और पवित्रता का प्रतीक है।
गहरा हरा (निचली पट्टी): यह समृद्धि, विकास और प्रकृति का प्रतीक है।बीच में स्थित ‘अशोक चक्र’ (गहरे नीले रंग में): इसमें 24 तीलियाँ हैं जो न्याय, प्रगति और जीवन की निरंतर गति का प्रतिनिधित्व करती हैं। ग्रोवर ने यह भी बताया कि राष्ट्रीय ध्वज केवल कपड़े का टुकड़ा नहीं, बल्कि हमारे स्वतंत्रता संग्राम की गौरवगाथा, राष्ट्रीय एकता और संविधान में निहित मूल्यों का प्रतीक है। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे तिरंगे का सम्मान करें, उसका अपमान न करें और हर अवसर पर उसे पूरे गर्व से फहराएँ।
विद्यालय के प्रधानाचार्य शुभकरण शर्मा ने अपने उद्बोधन में कहा कि हमें अपने पथ पर अडिग रहते हुए राष्ट्रध्वज, राष्ट्रीय प्रतीकों और संविधान का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने सभी को प्रेरित किया कि प्रत्येक नागरिक को अपने दायित्वों को समझते हुए प्रकृति संरक्षण और राष्ट्र सेवा में योगदान देना चाहिए।
इस अवसर पर विद्यालय के समस्त अध्यापकों — प्रकाश सिंह, मनीष मेहता, प्रवीन कुमार, देशराज, संदीप कुमार, प्रदीप कुमार, सुखविंदर सिंह, सुनीता कोहली, रितु रचना, रोहतास कुमार, मुंशी राम, सिकंदर सिंह — ने भी सक्रिय भागीदारी करते हुए कार्यक्रम को सफल बनाया।
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