सिरसा। आर्य समाज मन्दिर, सिरसा में रविवार को प्रत्येक माह की भांति इस माह भी मासिक सत्संग का आयोजन बड़े हर्षोल्लास के साथ किया गया। सर्वप्रथम मंदिर परिसर में हवन यज्ञ किया गया। कार्यक्रम में मुख्य प्रवक्ता के तौर पर दिल्ली से डा. जसवन्त सिंह पहुंचे। उन्होंने समस्त सिरसा निवासियों को ज्ञानोपदेश देते हुए कहा कि जीवन परमपिता परमेश्वर का दिया हुआ प्रसाद है। इसे हम चाहें तो मुस्कुरा कर जी सकते हैं और हम चाहें तो मुंह लटका कर जी सकते हैं। हम चाहें तो गुनगुनाकर जी सकते हैं,, हम चाहें तो भुनभुनाकर जी हो सकते हैं। बोलने के लिए जिह्वा भी ईश्वर ने हमें दी है, न केवल जिह्वा अपितु देखने के लिए आंखें भी हमें ईश्वर ने दी है। न केवल आंखें अपितु हाथ पैर शरीर आदि सब कुछ तैयार करके 9 महीने में हमें प्रदान कर दिया। परन्तु इससे क्या बोलना, देखना, खाना है, हमें 10 वर्षों तक नहीं आया। परमपिता परमेश्वर ने हम सबको तीन पेज की डायरी प्रदान की है, जिसमें से पहले पेज पर ईश्वर ने जन्म लिख दिया, दूसरे पेज पर मृत्यु भी लिख दी। जन्म और मृत्यु दोनों ईश्वर के हाथ में है। तीसरा पेज जिन्दगी का वो है, जो ईश्वर ने हमारे-आपके उपर छोड़ दिया है। जिन्दगी को जिन्दा दिली के साथ में जिएं, जिंदगी जिन्दा दिली का नाम है, मुर्दे दिल का क्या खाक जिया करते हैं। जीवन अनमोल धरोहर है, जिसका पल-पल हमको बड़ी सावधानी से जीना चाहिए। जीवन को प्रसाद बनाकर जीना चाहिए, विवाद बनाकर नहीं। इसके बाद भंडारा आयोजित किया गया, जिसमें सैकड़ों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। इस मौके पर समाज के अनेक महानुभाव उपस्थित थे।
जीवन परमपिता परमेश्वर का दिया हुआ प्रसाद है: डा. जसवंत सिंह
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