सिरसा। हरियाणा के राजकीय प्राथमिक विद्यालयों में इन दिनों शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित वार्षिक परीक्षाओं की प्रक्रिया ने शिक्षकों के समक्ष गंभीर व्यावहारिक समस्याएं खड़ी कर दी हैं। परीक्षा को लिखित एवं मौखिक दोनों रूपों में आयोजित किया जा रहा है, वहीं मौखिक मूल्यांकन को एक आॅनलाइन ऐप के माध्यम से अनिवार्य किया गया है, जो जमीनी स्तर पर अत्यंत अव्यावहारिक सिद्ध हो रहा है। राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ, सिरसा के जिला महासचिव विजय सहारण ने बताया कि पहली कक्षा के गणित विषय के आॅनलाइन मूल्यांकन में एक छात्र के लिए 100 से अधिक प्रश्न (लगभग 105-106) दर्ज हैं। यदि किसी कक्षा में औसतन 40 से 50 छात्र हैं, तो एक शिक्षक को हजारों प्रश्नों का मूल्यांकन ऐप में दर्ज करना पड़ रहा है। उदाहरण के तौर पर 40 छात्रों के लिए यह संख्या 4000 से अधिक प्रश्नों तक पहुंच जाती है। यदि प्रत्येक प्रश्न पर मात्र 15-30 सेकंड का समय भी लगाया जाए, तो कुल प्रक्रिया में 17 से 35 घंटे तक का समय लग सकता है, जबकि विभाग द्वारा इस कार्य के लिए केवल एक दिन का समय निर्धारित किया गया है। इसके अतिरिक्त, मौखिक मूल्यांकन के लिए प्रत्येक छात्र को अलग-अलग बुलाकर आकलन करना भी समयसाध्य एवं अव्यवहारिक है। स्थिति और भी चिंताजनक तब हो जाती है, जब शिक्षकों को होलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड में पीरियोडिक असेस्मेंट (सितंबर, दिसंबर) और वार्षिक मूल्यांकन के अंक भरने के निर्देश दिए जाते हैं, जबकि विभाग द्वारा समय पर पीरियोडिक असेस्मेंट आयोजित ही नहीं कराए गए। इस संबंध में जब संबंधित अधिकारियों (एबीआरसी/बीआरपी) से मार्गदर्शन मांगा गया, तो अनुमान के आधार पर आंकड़े भरने की सलाह दी गई, जो कि पूर्णत: अनुचित एवं पारदर्शिता के विरुद्ध है।
शिक्षक संघ का कहना है कि इस प्रकार की अव्यवहारिक एवं आंकड़ा-केंद्रित प्रक्रियाएं शक्षकों का बहुमूल्य समय नष्ट कर रही हैं, जो कि विद्यार्थियों के वास्तविक शिक्षण एवं विकास में लगाया जाना चाहिए। इससे शिक्षा की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। अत: संघ ने शिक्षा विभाग से मांग की है कि इस प्रकार की जटिल एवं अव्यावहारिक प्रक्रियाओं की तुरंत समीक्षा कर इन्हें सरल एवं व्यवहारिक बनाया जाए, ताकि शिक्षक अपनी ऊर्जा विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास में लगा सकें।
जारीकर्ता: राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ, सिरसा



