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संवदेनशील मुद्दों को लेकर सरपंच प्रतिनिधि मट्टदादू ने लिखा मुख्यमंत्री को पत्र

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गंभीर मामलों को नीतिगत व्यवस्था से सुलझाने को भेजे अमूल्य सुझाव
सिरसा। जिले के गांव मट्टदादू के सरपंच प्रतिनिधि व युवा जननायक जनता पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष रणदीप सिंह मट्टदादू ने गुरुवार को मुख्यमंत्री हरियाणा को पत्र लिखकर कुछ अहम मुद्दों पर उनका ध्यान आकर्षित किया है। मुख्यमंत्री को लिखे गए पत्र में मट्टदादू ने तालाबों की भूमि से अतिक्रमण हटाने की मुहिम में मानवीय दृष्टिकोण अपनाने, 15 वर्ष से पुराने मकानों को मालिकाना हक देने तथा तालाबों के वैकल्पिक जीर्णोद्धार के संबंध में नीति बनाने का पुरजोर आग्रह किया है। उन्होंने पत्र में लिखा है कि माननीय पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की सख्ती के बाद हरियाणा सरकार ने प्रदेश के सभी 22 जिलों के उपायुक्तों को तालाबों की जमीन को
अतिक्रमण मुक्त कराने के सख्त निर्देश दिए हैं। इस कार्रवाई को सर्वोच्च प्राथमिकता की श्रेणी में रखा गया है ताकि डिजिटल रिकॉर्ड और मैपिंग के आधार पर अवैध निर्माणों को तुरंत खाली कराया जा सके। मट्टदादू ने लिखा है कि सरकार का यह उद्देश्य बेहद सराहनीय है कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में गिरते भूजल स्तर को सुधारने के लिए तालाबों को पुनर्जीवित किया जाए, उनका सौंदर्यीकरण हो और गंदे पानी के शुद्धिकरण की व्यवस्था की जाए। जल संरक्षण आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है, परंतु अतिक्रमण हटाने संबंधी समाचार पत्रों में प्रकशित खबरों से ग्रामीणों में चिंता और दहशत का माहौल है।  गांवों में ऐसे सैकड़ों परिवार हैं, जिनके पूर्वजों के समय से इन तालाबों के किनारे उनके आशियाने बने हुए हैं। शासन प्रशासन की इस कार्रवाई से कई गरीब और जरूरतमंद परिवारों के बेघर होने का डर पैदा हो गया है। उन्होंने लिखा है कि बेशक जोहड़ का जीर्णोद्धार होना जरूरी है, लेकिन इस प्रक्रिया में गरीब परिवारों का आशियाना उजड़ जाना भी एक बहुत बड़ी सामाजिक व मानवीय समस्या है। रणदीप मट्टदादू ने इन सभी बातों के मद्देनजर मुख्यमंत्री हरियाणा को कुछ व्यवहारिक सुझाव भी भेजे हैं जिसमें कहा गया है कि सरकार इस मामले में एक ऐसी संवेदनशील और जनकल्याणकारी नीति बनाए, जिससे जोहड़ भी बच जाएं और गरीब का आशियाना भी सुरक्षित रहे। इस कड़ी में कुछ मापदंड तय किए जा सकते हैं। इनमें 15 साल या उससे अधिक समय से जिन मकानों की पक्की छत है और जिनके पास बिजली पानी का वैध कनेक्शन है, उन्हें कलेक्टर रेट के हिसाब से रजिस्ट्री करके मालिकाना हक सौंप दिया जाए। इससे सरकार को राजस्व भी मिलेगा और गरीबों के सिर पर छत भी सुरक्षित रहेगी। इसी प्रकार यदि किसी स्थान पर पुराना जोहड़ आबादी के बीच आने के कारण पूरी तरह समाप्त हो चुका है और वहां पक्के मकान बन चुके हैं, तो उस आबादी को तोडऩे के बदले ग्राम पंचायत की अन्य उपलब्ध भूमि में से नया जोहड़ बनाया जाए। इससे पर्यावरण का उद्देश्य भी पूरा होगा और स्थानीय निवासियों की छत भी बची रहेगी। सरपंच प्रतिनिधि रणदीप मट्टदादू ने इस पत्र के माध्यम से आशा व्यक्त की है कि यदि इस गंभीर और संवेदनशील समस्या का समाधान पूरी सूझबूझ, सहानुभूति और मानवीय दृष्टिकोण से किया जाए तो विकास की इस दौड़ में कोई गरीब बेघर नहीं होगा।

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