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आज भी चमत्कार होते है परन्तु भिखारी और व्यापारी बनना छोड़ कर भक्त बनों

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आज प्रवचन सभा में श्री भक्क्तामर अनुष्ठान के प्रथम दिवस पर डां. साध्वी श्री चन्दना जी म. ने बताया आप भ. की स्तुति करने आओ या ना आओ परन्तु भ. को कोई फर्क नहीं पड़ता। आप अपने भीतर देखों तुम कैसे भक्त हो। भक्क्तामर जी चमत्कारी स्तोत्र हैं आज भी चमत्कार होते है परन्तु भिखारी और व्यापारी बनना छोड़ कर भक्त बनों तो चमत्कार स्वयं ही दिखेगों भक्तामरजी का रहस्य क्या है। 7, 13 वीं शताब्दी हो या कुछ भी हो प्धारा नगरी की घटना है। मानतुंग आचार्य की परीक्षा हेतु राजा ने कहा तुम्हारे धर्म में शक्ति है तो चमत्कार करके दिखाओ। आचार्य मानतुंग जी ने कहा धर्म में कहीं चमत्कार करने को नहीं बोला लेकिन धर्म की रक्षा के लिए चमत्कार स्वयं ही हो जाया करते है। राजा ने मांतुग आचार्य को जेल में बंदी बना दिया उन्होंने समाधि को खोला देखा 48 तालों में खुदको बंदी कप में पाया तो उन्होंने 48 श्लोक की रचना की जैसे एक-एक श्लोक की स्चना हुई एक एक ताला खुलते – खुलते 48 श्लोक के साथ 48 ताले भी खुल गए इसलिए ये चमत्कारी स्तोत्र बताया गया है। राजा की जैन धर्म के प्रति निष्ठा-विश्वास बढ़ गया। इस प्रकार धर्म प्रभावना कर मुनि वहां से विहार कर गएरा राजा ने अपनी नगरी में बहुत से जिन मंदिर बनवाएँ । श्री मानलुंग आचार्य के द्वारा रचित श्री भक्तामर स्तोत्र का जो श्राध्दा भक्ति से प्रतिदिन पाठ करते है वे मनचाही सिद्धि को प्राप्त करते है। महासाध्वी श्री श्रेष्ठा ज़ी म. ने सक्रांति का पावन नाम सुनाया।आज की प्रथम श्लोक के लाभायी परिवार संजय (जोरा जैन) सपुत्र श्री मंगत राय जैन परिवार ने लिया ।अध्यक्ष सन्दीप जैन ज्ञान चंद जैन,  पुर्ण चंद जैन,अंकुर गुप्ता,  जोरा जैन ओम प्रकाश सैनी, साईं ज़ी सेतिया, जगदीश राय जैन लवली धालीवाल ईस कुमार प्रेम जैन सुखदेव क्षोरड महिला मण्डल सरोज जैन रिटा जैन, संजू जैन, वबीता जैन कंचन जैन तनुजा जैन, अंजू जैन।

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