सिरसा। अखिल भारतीय सेवा संघ महिला शाखा हिसार के तत्वावधान में आयोजित एक विशेष बैठक में मौन साधना जैसे गहन एवं आध्यात्मिक विषय पर विचार-विमर्श किया गया। यह महत्वपूर्ण कार्यक्रम राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. इंद्र गोयल की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ। उनके मार्गदर्शन में उपस्थित सभी सदस्यों ने मौन साधना के महत्व, उसके आंतरिक प्रभाव और जीवन में उसके सकारात्मक परिणामों पर गहराई से चर्चा की। यह सत्र न केवल ज्ञानवर्धक रहा, बल्कि आत्मचिंतन और मानसिक शांति की ओर प्रेरित करने वाला भी सिद्ध हुआ। डॉ. इंद्र गोयल ने अपने विचारों में बताया कि मौन केवल शब्दों का अभाव नहीं, बल्कि आत्मा की आवाज को सुनने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि आज के भागदौड़ भरे जीवन में व्यक्ति बाहरी शोर में इतना उलझ जाता है कि अपने भीतर की शांति को भूल जाता है। मौन साधना हमें स्वयं से जोड़ती है और मानसिक संतुलन बनाए रखने में सहायक होती है। उनके प्रेरणादायक विचारों ने सभी उपस्थित सदस्यों को गहराई से प्रभावित किया। इस अवसर पर प्रांतीय संगठन मंत्री महेंद्र सैनी, प्रांतीय अध्यक्ष महेंद्र सेतिया एवं प्रांतीय महासचिव आकाश सेन की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम को और अधिक प्रभावशाली बनाया। सभी ने अपने-अपने अनुभव साझा करते हुए मौन साधना के विभिन्न पहलुओं को उजागर किया और इसे जीवन में अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम में महिला शाखा की सक्रिय भागीदारी भी विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। राष्ट्रीय महिला प्रमुख सुधा कांत, महिला शाखा प्रमुख सुरुचि असीजा, शाखा अध्यक्ष सुनेना नागपाल, शाखा सचिव अंजलि भाटिया, शाखा उपाध्यक्ष रोजी चावला, संगठन मंत्री पूनम, सलाहकार सुमन सैनी, सह कोषाध्यक्ष प्रीति भाटिया सहित हीतू भाटिया एवं स्नेह चौधरी ने भी अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम की गरिमा को बढ़ाया। इन सभी ने बड़े उत्साह और समर्पण के साथ इस चर्चा में भाग लिया और अपने विचारों के माध्यम से विषय को और अधिक समृद्ध किया। समापन में यह स्पष्ट हुआ कि मौन साधना केवल एक साधना नहीं, बल्कि एक जीवनशैली है, जो हमें आत्मिक शांति, धैर्य और संतुलन प्रदान करती है। इस सार्थक आयोजन ने सभी को एक नई दिशा और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान की, जिससे वे अपने जीवन में अधिक संयमित और जागरूक बन सके। तत्पश्चात सभी को डा. इंद्र गोयल द्वारा लिखित बहुचर्चित पुस्तक मौन साधना एक अद्वितीय अनुभव सभी को सप्रेम भेंट की गई। सभी ने इस पुस्तक को हृदय से स्वीकार और मंथन करने का आश्वासन दिया।
मौन साधना एक साधना नहीं, बल्कि एक जीवनशैली है: डा. इंद्र गोयल
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